Tag: #नदियाँ

समाज को उजाड़ कर बस ना पाएगी लोकतक झील

समाज को उजाड़ कर बस ना पाएगी लोकतक झील

पंकज चतुर्वेदी देश को मणिपुर की चिंता तब ही होती है जब वहाँ से कोई हिंसा की बात हो लेकिन इस राज्य का अस्तित्व और […]

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झारखण्ड - जिस राज्य की पहचान ही सुरम्य वन और सघन जल संसाधन हुआ करती थी,

झारखण्ड

पंकज चतुर्वेदी जिस राज्य की पहचान ही  सुरम्य वन और सघन जल संसाधन हुआ करती थी, आज गर्मी की शुरुआत में ही बूंद बूंद पानी को […]

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अलग छत्तीसगढ़ राज्य बनने से बस्तर को भले ही कुछ खास भला ना हुआ हो, लेकिन वहां शहरीकरण की गति तो बढ़ी।

तालाब खतम करने से प्यासा है बस्तर

पंकज चतुर्वेदी अलग छत्तीसगढ़ राज्य बनने से बस्तर को भले ही कुछ खास भला ना हुआ हो, लेकिन वहां शहरीकरण की गति तो बढ़ी। पूरे […]

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धरती के बढ़ते तापमान का सीधा असर गलेशयर पर हो रहा है और इन बर्फ के बादलों की गलने से नदियों में प्रवाह बढ़ रहा है और अनियमित भी हो रहा है । यह लेख इसी चिंता पर है

बढ़ती तपन के  गलन में  हो  रहे इजाफे से अनियंतिरत होतीं हिमालय की नदियां

पंकज चतुर्वेदी धरती के बढ़ते तापमान का सबसे प्रत्यक्ष और चिंताजनक असर आज हिमालय के ग्लेशियरों पर दिखाई दे रहा है। दुनिया का तीसरा ध्रुव […]

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Rohit Kaushik

करोड़ों रुपये खर्च, फिर भी कराह रही यमुना

रोहित कौशिक      देश की महत्वपूर्ण नदी यमुना का प्रदूषण एक बड़ी समस्या बन गया है। यमुना के प्रदूषण को लेकर समय-समय पर कई अध्ययन […]

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2026 की गंगा बाढ़ के बाद एक बुनियादी प्रश्न उठता है—क्या गंगा में पानी असामान्य रूप से अधिक आया, या हमने पिछले 30–50 वर्षों में नदी के फैलने की प्राकृतिक जगह को भी लगातार कम किया है? इसका उत्तर केवल आंखों से देखकर या वर्तमान राजस्व नक्शे से नहीं मिल सकता। इसके लिए 1970–80 के दशक से 2026 तक गंगा के सक्रिय बाढ़-मैदान में हुए भूमि-उपयोग परिवर्तन का उपग्रह आधारित वैज्ञानिक ऑडिट आवश्यक है।

अजय सहाय सबसे पहले एक तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है। पूरी गंगा के सक्रिय बाढ़-मैदान में पिछले 30–50 वर्षों में ठीक कितनी कॉलोनियां, कितने किलोमीटर […]

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बिहार का शोक बनी कोसी नदी: जलवायु परिवर्तन, बढ़ता संकट

पंकज चतुर्वेदी सहरसा जिले के सिरवार गाँव में कोसी ऐसी बिफरी कि जमीन का बाद हिस्सा अपने साथ ले गई । दर्जनों घर नदी में […]

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