पंकज चतुर्वेदी देश की राजधानी की आबादी बढ़ती जा रही है और उसी गति से यहाँ पानी की मांग बढ़ यही है । यमुना से […]
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‘भारत में जलवायु परिवर्तन’
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव न केवल वैश्विक स्तर पर देखा जा रहा है, बल्कि यह स्थानीय पर्यावरणीय समस्याओं को भी जन्म दे रहा है। यह […]
Read moreबाढ़ खलनायक नहीं होती !
पंकज चतुर्वेदी साल के दस महीने लाख मिन्नतों के बाद जब आसमान से जीवनदाई बरसात का आशीष मिलता है तो भारत का बड़ा हिस्सा इससे […]
Read moreजलवायु परिवर्तन और जल संकट पर प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण ही एकमात्र समाधान
विकास परसराम मेश्राम जल संकट केवल हमारे देश की ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की समस्या है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, आज दुनिया की 26 […]
Read moreबाढ़, फैलाव और अविरलता से ही निर्मल होगी दिल्ली में यमुना
पंकज चतुर्वेदी सावन बीत गया , भादों भी आधा निकल गया दिल्ली और उसके आसपास यमुना नदी के जल-ग्रहण क्षेत्र कहलाने वाले इलाकों में पर्याप्त […]
Read moreनदी
सरिता, नदी, तरंगिनि, तटिनी और न जाने क्या क्या नामों से हम प्रकृति के इस जलप्रवाह रूप को जानते है। नदियां अपने आप में चिंतन का विषय हैं।
Read moreसी पी सी बीः संकट में देश की नदियाँ
देश की नदियां इस समय बेहद संकट के दौर से गुजर रही हैं , केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने देश के सभी नदियों की स्थित पर नवंबर 2022 में एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की थी । यहाँ इस रिपोर्ट को देखा जा सकता है ।
Read moreगाद से गहराता नदियों का संकट
विदित हो सन् 2016 में केंद्र सरकार द्वारा गठित चितले कमेटी ने साफ कहा था कि नदी में बढती गाद का एकमात्र निराकरण यही है कि नदी के पानी को फैलने का पर्याप्त स्थान मिले।
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