अमरेली जिले का “नाना माचियाला” गांव अभिषेक गोंडलिया हरित और स्वच्छ वातावरण के लिए ग्रामीणों का भगीरथ प्रयास सौराष्ट्र क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के लिए […]
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पानी बचाने की क्रांति
भारतीय अनुभव और वैश्विक तकनीकों का मेल अजय सहाय भारत में सरकारी तालाबों की भूमिका वर्ष 2047 तक ‘जल आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य की प्राप्ति […]
Read moreनदियाँ बहती रहीं, सूखे बढ़ते रहे
भारत का अधूरा जल प्रबंधन सपना अजय सहाय भारत में प्रतिवर्ष औसतन 4000 अरब घन मीटर (BCM) वर्षा जल प्राप्त होने के बावजूद भी स्वतंत्रता […]
Read more10 वर्षों में असमान रही जुलाई की शुरुआती वर्षा
वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन मानते हैं इसकी बड़ी वजह, इस वर्ष 12 दिनों में रिकॉर्ड की गई 180 मिमी बारिश पिछले 10 वर्षों में जुलाई की […]
Read moreसमृद्ध किसान, समृद्ध हिमाचल
हिमाचल प्रदेश में कृषि का पारंपरिक स्वरूप रोहित प्राशर हिमाचल प्रदेश, अपनी हरी-भरी वादियों, बर्फ से ढकी चोटियों और ऊंचे-नीचे पहाड़ी ढलानों पर फैले खेतों […]
Read moreजलवायु परिवर्तन से गहरा गया है हिमालय का भूस्खलन
उत्तराखंड के पहाड़ों के रौद्र रूप ने वहाँ जीवन थाम दिया है पंकज चतुर्वेदी अभी तो बरसात शुरू हुई है और उत्तराखंड के पहाड़ों के […]
Read moreमानसून की बारिश के असमान वितरण से कई जिलों में भारी तबाही
मौसम पर हावी जलवायु परिवर्तन… कहीं ज्यादा तो कहीं बहुत कम बारिश जलवायु परिवर्तन स्थानीय मौसम पर भी हावी होता दिखाई दे रहा है। जून […]
Read moreपानी पंचायत
जल संकट समाधान की जनसहभागिता आधारित क्रांति और जल आत्मनिर्भर भारत 2047 का मार्गदर्शक मॉडल अजय सहाय पानी पंचायत की अवधारणा भारत के ग्रामीण क्षेत्रों […]
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