पूर्वोत्तर जनस्मृति का डिजिटल अभिलेख वंदना मेनन सदियों से पूर्वोत्तर भारत की महान नदियां इस क्षेत्र की सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान को आकार देती रही […]
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हमारी लोक संस्कृति के नायक हैं बाघ!
“मानव ने हमेशा से ही बाघ को वीरता और देवत्व भाव से देखा है, हमारी मान्यताओं में वह आदिशक्ति का वाहक है। वहीं बाघों ने […]
Read moreविकास बनाम विनाश: हसदेव से हैदराबाद तक पेड़ कटाई
ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरणीय आपदा का वैज्ञानिक विश्लेषण अजय सहाय छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खनन के नाम पर 3,68,217 पेड़ों के काटे […]
Read moreशहरी बाढ़ बनाम वर्षा जल प्रबंधन
वैश्विक सर्वोत्तम मॉडल के साथ भारत के लिए वैज्ञानिक समाधान अजय सहाय वर्ष 2025 में भारत के विभिन्न महानगरों जैसे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, […]
Read moreवर्का वाटर
वायुमंडलीय नमी से जल आत्मनिर्भर भारत की ओर एक वैज्ञानिक नवाचार अजय सहाय “वर्का वाटर: भारत में वायुमंडलीय जल संग्रहण की एक वैज्ञानिक संभावना और […]
Read moreधरती के पेट की सूखती परतें: जलविज्ञान, विज्ञान और सामाजिक चेतावनी
राज्यों में भी जल विभागों का समन्वय न होना अजय सहाय भारत को हर वर्ष औसतन 4000 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) वर्षा जल प्राप्त होता […]
Read more“ज़हरीली हवा — कब तक जीवन साँस ले पाएगा?”
महानगरों की चमक, औद्योगिक प्रगति और निरंतर बढ़ते वाहन सुनीता बंसल हम एक ऐसे युग में जी रहे हैं जहाँ सांस लेना भी अब सुरक्षित […]
Read moreइंद्रावती: लोकगाथा, लोकसाहित्य और बस्तर की जलसंस्कृति का जीवंत संगम
छत्तीसगढ़ की इंद्रावती नदी डॉ. रुपेन्द्र कवि नदियाँ जब केवल जलधारा न रहकर संस्कृति की वाहक, लोक स्मृति की रक्षक और समूह-मानवता की चेतना बन […]
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