भू-वैज्ञानिकों के अनुसार हिमालय दुनिया की सबसे युवा पर्वतमालाओं में से एक अजय सहाय 5 अगस्त 2025 को धराली (हर्षिल घाटी) में आई अचानक और […]
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घटते तालाब, बढ़ता जल संकट: गाँव की जल-जीवन रेखा
तालाबों का भू-वैज्ञानिक, पर्यावरणीय, सामाजिक और कानूनी महत्व अजय सहाय भारत की पारंपरिक जल-संस्कृति में तालाब (पोंड/टैंक) हजारों वर्षों से ग्रामीण जल प्रबंधन का आधार […]
Read moreगंगा से गोदावरी तक: ‘डूबते’ डेल्टा और संकट में भारत का भविष्य
भारत के प्रमुख नदी डेल्टा और उनके किनारे तेजी से डूब रहे हैं पंकज चतुर्वेदी भारत की नदियां वास्तव में करोड़ों लोगों के लिए जीवनदायिनी […]
Read moreभारत में 45 करोड़ लीटर ईंधन की रोज़ाना खपत
प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग और हरित ऊर्जा की वैज्ञानिक आवश्यकता अजय सहाय भारत में प्रतिदिन लगभग 10 करोड़ लीटर पेट्रोल और 35 करोड़ लीटर डीज़ल का […]
Read moreनदियों की कहानी, समुदायों की ज़ुबानी : पूर्वोत्तर जनस्मृति का डिजिटल अभिलेख
जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच, नदी किनारे बसे समुदाय मेमोरी मैप्स, ऑडियो नोट्स और तस्वीरों के माध्यम से मौखिक इतिहास और पारंपरिक अनुकूलन रणनीतियों […]
Read moreस्वच्छता का पर्व है होली
कहानियां,किवदंतियां कुछ भी कहें,लेकिन इस पर्व का वास्तविक संदेश तो – स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण ही है पंकज चतुर्वेदी होली भारत में किसी एक जाति, […]
Read moreएनजीटी में होने चाहिए 51 सदस्य, हैं महज 5
साफ है कि सरकार कथित विकास के नाम पर पर्यावरण पर बुलडोजर चलाते रहना चाहती है पंकज चतुर्वेदी बुदेलखंड में छतरपुर शहर के सबसे बड़े […]
Read moreगंगा जल गुणवत्ता का वैज्ञानिक विश्लेषण
सरकारी मानकों के अनुसार फीकल कोलिफॉर्म, BOD और वास्तविक स्वच्छता की सच्चाई अजय सहाय गंगा नदी की स्वच्छता को समझने के लिए हमें भावनाओं से […]
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