महात्मा गांधी विश्व में मुक्ति के महानतम और अलीक योद्धा रहे हैं। वह हर तरह के अभिशाप और विकार से मुक्ति के हिमायती थे। आज धरती प्रदूषण से मुक्ति की आकांक्षी है। गांधी का कहना था कि धरती सबकी जरूरतें पूरी कर सकती है, सबका लालच नहीं। उन्होंने कहा था- The earth, the land, the air and the water are not an inheritance from our forefathers but an loan from our children. So we have to handover to them at least as it was handed over to us.
क्या महात्मा के इस अमृत वाक्य में धरती को बचाने का मंत्र निहित नहीं है?
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ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ निर्णायक जंग अभी बाकी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था-आप किसी शोर का सुनना चाहते हैं या नहीं, यह तय करने का आपको पूरा अधिकार लेकिन सड़क पर जोर जोर से बात करते लोग या साझा तिपहिया में बजते कानफोडू स्टीरियो आदि को इस आदेश की कतई परवाह नहीं ।
Read moreतकनीकी से नहीं आत्म नियंत्रण से थमेगा साँसों का जहर
शहरों में भीड़ कम हो, निजी वाहन कम हों , जाम न लगे, हरियाली बनी रहे – इसी से जहरीला धुंआ कम होगा । मशीने मानवीय भूल का निदान होती नहीं । हमें जरूरत है आत्म नियंत्रित ऐसी प्रक्रिया की जिससे वायु को जहर बनाने वाले कारक ही जन्म न लें ।
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