पंकज चतुर्वेदी सिंधु जल के बंटवारा फिर चर्चा में है । भारत की किशनगंगा और रतले परियोजनाओं पर न्यूट्रल या तटस्थ विशेषज्ञ के ब्यान को […]
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केन्द्रीय बजट 2025 में पर्यावरण पर टिप्पणी
चिंताएं तो हैं लेकिन समाधान नहीं पंकज चतुर्वेदी शनिवार को सुश्री निर्मला सीतारमन द्वारा प्रस्तुत 2025-26 के केंद्रीय बजट में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को 3,412.82 […]
Read more2 फरवरी ‘विश्व आर्द्रभूमि दिवस’(वर्ल्ड वैटलैंड डे) पर विशेष
सुनील कुमार महला, प्रति वर्ष 2 फरवरी को ‘विश्व आर्द्रभूमि दिवस’(वर्ल्ड वैटलैंड डे) पर्यावरण में आर्द्रभूमि के महत्व और भूमिका के बारे में जागरूकता बढ़ाने […]
Read moreजलवायु परिवर्तन
आपदाओं से सरकारों पर बढ़ता है वित्तीय बोझ देश हर साल पांच से छह उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का सामना करता है। इनमें से दो या तीन […]
Read more‘भारत में जलवायु परिवर्तन’
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव न केवल वैश्विक स्तर पर देखा जा रहा है, बल्कि यह स्थानीय पर्यावरणीय समस्याओं को भी जन्म दे रहा है। यह […]
Read moreजलवायु परिवर्तन और जल संकट पर प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण ही एकमात्र समाधान
विकास परसराम मेश्राम जल संकट केवल हमारे देश की ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की समस्या है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, आज दुनिया की 26 […]
Read moreहमारे अस्तित्व से जुड़ा है जल प्रबंधन
भारत को 6 जलक्षेत्रों (इसे मैं जल राज्य कहूंगा) में विभाजित किया है और सीमाओं का निर्धारण कर डिजिटल मैप विकसित किए हैं। इन 6 जल क्षेत्रों को 37 बेसिन, 117 कैचमेंट एरिया, 588 सबकैचमेंट एरिया, 3854 वाटरशेड, 49618 सब-वाटरशेड और कुल 3 लाख 21 हजार 324 माइक्रोवाटरशेड में बांटकर हर एक का जमीनी चिन्हांकन करके उसका एक यूनिक नेशनल कोड जारी किया है।
Read moreसी ई ई डब्लू और इंडिया क्लाइमिट कोलाबोरेटिव ः जलवायु परिवर्तन जोखिम
सी ई ई डब्लू और इंडिया क्लाइमिट कॉलब्रेशन द्वारा भारत के हर जिले की जलवायु परवर्तन के प्रति संवेदनशीलता और संभावित प्राकृतिक आपदा पर यह शानदार रिपोर्ट हर देशवासी को पढ़ना चाहिए क्योंकि यह स्थानीय स्तर पर जलवायु परिवर्तन से उपज रहे संकट के निदान के तलाशने में सहायक है
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