रोहित कौशिक दिल्ली में एक बार फिर युमना नदी में जहरीले झाग की सफेद चादर देखी गई है। हर साल अक्टूबर-नवम्बर में यमुदा नदी में […]
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दिल्ली में जहर हो चुका भू जल
पंकज चतुर्वेदी देश की राजधानी की आबादी बढ़ती जा रही है और उसी गति से यहाँ पानी की मांग बढ़ यही है । यमुना से […]
Read moreबाढ़, फैलाव और अविरलता से ही निर्मल होगी दिल्ली में यमुना
पंकज चतुर्वेदी सावन बीत गया , भादों भी आधा निकल गया दिल्ली और उसके आसपास यमुना नदी के जल-ग्रहण क्षेत्र कहलाने वाले इलाकों में पर्याप्त […]
Read moreपानी की किल्लत से कराह रही दिल्ली
दिल्ली को सालाना ही पीने के पानी की किल्लत से दो – चार होना पड़ता है। पीने के पानी के लिए पानी के टेंकर पर लंबी – लंबी लाइन लगानी पड़ती हैं।
Read moreनदी
सरिता, नदी, तरंगिनि, तटिनी और न जाने क्या क्या नामों से हम प्रकृति के इस जलप्रवाह रूप को जानते है। नदियां अपने आप में चिंतन का विषय हैं।
Read moreजीवनदायिनी गंगा को संजीवनी मिलना बहुत जरूरी
सीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार, 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में से 31 में नदियों का प्रवाह प्रदूषित है।
Read moreयमुना की बेपरवाही से प्यासी है दिल्लीः पंकज चतुर्वेदी
“रिवर” से “सीवर” बन गई दिल्ली में यमुना को नया जीवन देने के लिए आज से कोई 9 साल पहले राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण अर्थात एन जी टी ने एक आदेश दिया था कि दिल्ली मने नदी का जहां तक बहाव है अर्थात उसका फ्लड प्लैन या कछार है , उसका सीमांकन किया जाए ।
Read moreछोटी नदियों की सेहत सुधारे बगैर नहीं बचेगी गंगा-यमुना
2014 में सत्ता में आते ही मोदी सरकार ने गंगा को निर्मल और अविरल बनाने को खासा महत्व दिया था और इसके लिए नमामि गंगे योजना की घोषणा की थी। योजना पर काम अक्टूबर 2016 में आए आदेश के बाद से शुरु हो सका था। वित्त वर्ष 2014-15 से लेकर 2020-2021 तक इस नमामि गंगे योजना के तहत पहले 20 हजार करोड़ रुपए खर्च करने का रोडमैप तैयार किया गया था जो कि बाद में बढ़ाकर 30 हजार करोड़ रुपए कर दिया गया।
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