© Adobe Stock/Napol भीषण गर्मी से परिवहन बुनियादी ढाँचा प्रभावित हो सकता है, क्योंकि सड़कों, हवाई पट्टियों और रेल पटरियों के मुड़ने या विकृत होने का ख़तरा बढ़ जाता है.
भीषण तापलहर के कारण योरोप में रेल पटरियाँ पिघल रही हैं और सड़कें मुड़ रही हैं, जिससे परिवहन सेवाएँ प्रभावित हो रही हैं. इस बीच, संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आने वाले दशकों में योरोप, मध्य एशिया और उत्तरी अमेरिका में चरम मौसम की घटनाएँ और बढ़ेंगी.
योरोप के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक आयोग (UNECE) की एक नई रिपोर्ट (Assessment of Climate Change Impacts and Adaptation for Inland Transport: Towards climate resilient transport systems) के अनुसार, 2051 से 2080 के बीच चरम मौसम से सड़कों, रेलमार्गों, जलमार्गों, बन्दरगाहों और हवाई अड्डों पर गम्भीर असर पड़ सकता है.
UNECE के एक प्रवक्ता ने यूएन न्यूज़ से कहा, “पश्चिमी योरोप में मौजूदा भीषण गर्मी ने जलवायु ख़तरों और परिवहन पर उनके प्रभावों को उजागर कर दिया है.”
ये प्रभाव अभी से दिखाई दे रहे हैं. बेल्जियम, डेनमार्क, फ़्राँस और ब्रिटेन सहित कई देशों में भीषण गर्मी के कारण रेलगाड़ियाँ देरी से चल रही हैं या रद्द की जा रही हैं.
सड़कों और रेल पटरियों के मुड़ने, वातानुकूलन और यातायात संकेतों के ठप होने, नदियों में नौवहन बाधाओं तथा तारों व सिग्नल प्रणालियों के अत्यधिक गर्म होने से परिवहन सेवाएँ प्रभावित हो रही हैं. फैली हुई पटरियों पर दबाव कम करने के लिए रेलगाड़ियों की रफ़्तार भी घटाई जा रही है.
प्रमुख निष्कर्ष
रिपोर्ट के अनुसार:
- परिवहन प्रणालियों के लिए प्रमुख ख़तरों में बाढ़, अत्यधिक गर्मी, बर्फ़ और स्थाई रूप से जमी भूमि में कमी तथा समुद्र-स्तर में वृद्धि शामिल हैं.
- परिवहन ढाँचे को हर वर्ष 25 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाले 10 से 50 अतिरिक्त दिनों का सामना करना पड़ सकता है. कुछ क्षेत्रों में ऐसे दिनों की संख्या सालाना 200 तक पहुँच सकती है. इससे सड़कें ख़राब होने, पुलों के जोड़ फैलने, रेल पटरियाँ मुड़ने और बुनियादी ढाँचे के आसपास जंगल की आग का ख़तरा बढ़ेगा.
- वर्ष 2100 तक दुनिया के 71 से 89 प्रतिशत बन्दरगाह अत्यधिक समुद्री तूफ़ानों के ख़तरे में आ सकते हैं.
- वर्ष 2100 तक योरोप के लगभग 50 लाख लोगों और उनके परिवहन ढाँचे को लगभग हर साल तटीय बाढ़ का सामना करना पड़ सकता है.
‘गम्भीर परिणाम’
रिपोर्ट के अनुसार, समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो चरम मौसम से होने वाला आर्थिक नुक़सान तेज़ी से बढ़ सकता है.
UNECE की कार्यकारी सचिव तातियाना मोल्चान ने कहा, “परिवहन प्रणालियाँ समाज और अर्थव्यवस्था के सुचारु संचालन के लिए बेहद अहम हैं. इनमें रुकावट से समुदायों पर गम्भीर असर पड़ सकता है और भारी आर्थिक नुक़सान हो सकता है.”
वर्ष 2024 के अटलांटिक तूफ़ान मौसम के दोरान कुल 232 अरब डॉलर का नुक़सान हुआ. बन्दरगाहों को सालाना 7.5 अरब डॉलर का नुक़सान होने का अनुमान है. वहीं, वैश्विक समुद्री परिवहन, व्यापार और आपूर्ति श्रृँख्लाओं के लिए वार्षिक जोखिम 81 अरब डॉलर तथा आर्थिक गतिविधियों के लिए 122 अरब डॉलर आँका गया है.
चिन्ताजनक अनुमान
रिपोर्ट के अनुसार, नॉर्वे के पश्चिमी तट, एल्प्स, बाल्कन क्षेत्र, उत्तरी तुर्किये, मध्य एशिया के कुछ हिस्सों, तटीय ब्रिटिश कोलम्बिया और अमेरिका के पूर्वी तट में भारी बारिश बढ़ने की आशंका है.
इससे सड़कों, रेलमार्गों और अन्तर्देशीय जलमार्गों पर भूस्खलन, तटबन्ध टूटने, जल निकासी व्यवस्था पर दबाव बढ़ने और बुनियादी ढाँचे के बह जाने का ख़तरा बढ़ सकता है.
रेल पटरियों के मुड़ने और सिग्नल प्रणालियों के अत्यधिक गर्म होने से रेल सेवाएँ भी बाधित हो सकती हैं.
रिपोर्ट का अनुमान है कि 2050 से 2080 के बीच योरोप के ई-रेल नेटवर्क के 90 प्रतिशत हिस्से को, 1970 से 2000 की तुलना में, हर वर्ष 25 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाले 10 अतिरिक्त दिनों का सामना करना पड़ सकता है. 32 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाले दिनों की संख्या भी 10 दिन बढ़ सकती है.
अनुकूलन अब ‘अनिवार्य’
रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु अनुकूलन से आर्थिक नुक़सान कम करने, निवेश की रक्षा करने, परिवहन सेवाएँ जारी रखने और उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलती है.
UNECE की प्रमुख तातियाना मोल्चान ने कहा, “चरम मौसम अब भविष्य का ख़तरा नहीं, बल्कि आज की वास्तविकता है. इसलिए परिवहन बुनियादी ढाँचे को इसके अनुरूप ढालना अनिवार्य है.”
विश्व संसाधन संस्थान (WRI) के अनुसार, जलवायु अनुकूलन पर ख़र्च किए गए प्रत्येक डॉलर से 10.50 डॉलर से अधिक के आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय लाभ मिलते हैं.
जलवायु सम्बन्धी बिगड़ते अनुमानों को देखते हुए रिपोर्ट में:
- हर स्तर पर अनुकूलन प्रयासों को मज़बूत करने का आहवान किया गया है.
- सार्वजनिक और निजी संस्थाओं से परिवहन बुनियादी ढाँचे को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल और अधिक सहनक्षम बनाने को प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया है.
- इसमें मौजूदा ख़तरों का विश्लेषण, भविष्य के प्रभावों का आकलन और सहनक्षमता बढ़ाने वाले उपाय तैयार करने की सिफ़ारिश की गई है.
- साथ ही, जोखिम और आर्थिक नुक़सान कम करने के लिए मज़बूत नीतिगत व क़ानूनी ढाँचे पर भी ज़ोर दिया गया है.
बढ़ते तापमान से निपटने के साधन
रिपोर्ट में क्षेत्र के उन प्रमुख अन्तर्देशीय परिवहन मार्गों और केन्द्रों की पहचान की गई है, जिन पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है.
इसमें तापमान और वर्षा के सम्भावित बदलाव दर्शाने वाले मानचित्र भी शामिल हैं. इनकी मदद से सरकारें और परिवहन विशेषज्ञ बदलते हालात को समझकर स्थानीय परिवहन प्रणालियों के जोखिम और कमज़ोरियों का आकलन कर सकते हैं.
कौन-से उपाय कारगर साबित हो रहे हैं?
UNECE की रिपोर्ट में विभिन्न देशों में अपनाए जा रहे जलवायु अनुकूलन उपायों के उदाहरण भी दिए गए हैं:
- फ़्राँस: देश को वर्ष 2100 तक तापमान में 3 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि के लिए तैयार किया जा रहा है. इसके तहत 21,073 किलोमीटर राष्ट्रीय सड़क नेटवर्क की संवेदनशीलता का आकलन और 3,000 रेलवे स्टेशनों के लिए अनुकूलन रणनीति तैयार की जा रही है.
- जर्मनी: 16,000 घन मीटर चट्टानें गिरने से एक महत्वपूर्ण योरोपीय मालवाहक रेलमार्ग सात सप्ताह तक बन्द रहा. इसके बाद उच्च-रेज़ॉल्यूशन जोखिम मानचित्रों की मदद से भूस्खलन और ढलानों से मलबा बहने के ख़तरों का आकलन किया गया, ताकि सुरक्षात्मक उपायों को प्राथमिकता दी जा सके.
- पुर्तगाल: 42 किलोमीटर लम्बी मोंडेगो मोबिलिटी प्रणाली के लिए बाढ़, भूस्खलन और जंगल की आग के जोखिमों का आकलन किया गया. इसके आधार पर अधिक तापमान सहने वाली सड़क सतहें और सौ वर्ष में एक बार आने वाली बाढ़ के जलप्रवाह को सम्भालने योग्य जल निकासी प्रणालियाँ विकसित की गईं.