सुनील कुमार महला उत्तर भारत में गर्मी अभी से कहर बरसाने लगी है जबकि अभी अप्रैल माह की शुरुआत ही हुई है। पाठकों को बताता […]
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पर्यावरण संरक्षण, लैंगिक समानता और हमारी सांस्कृतिक विरासत को संजोकर रख रहा राजसमंद का अनूठा गांव पिपलांत्री !
सुनील कुमार महला पेड़ हमारे पर्यावरण, हमारे पारिस्थितिकी तंत्र,मानव व धरती के समस्त प्राणियों, वनस्पतियों को बनाए रखने के लिए बहुत आवश्यक है। कहना ग़लत […]
Read moreगर्मी में भी घुट रही हैं दिल्ली की सांसें
पंकज चतुर्वेदी पंजाब के सुदूर गाँव की रहने वाली इस युवती ने हिन्दी में पी एचडी किया और दिल्ली के प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्थान में काम […]
Read moreराष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान रुड़की
हिंदी में तकनीकी पुस्तक लेखन पुरस्कार योजना वर्ष 2024 जल शक्ति मंत्रालय, जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के […]
Read moreहिंडन नदी पुनरुद्धार योजना
हिंडन जल बिरादरी इंसान के लालच, लापरवाही ने हिंडन को ‘हिडन’ बना दिया है लेकिन जब नदी अपना रौद्र रूप दिखाती है तब मानव जाति […]
Read moreलू से निबटने को कमर कसना होगा
लू अर्थात हीट वेव आमतौर पर रुकी हुई हवा की वजह से होती है। उच्च दबाव प्रणाली हवा को नीचे की ओर ले जाती है। यह शक्ति जमीन के पास हवा को बढ़ने से रोकती है।
Read moreबदलते पर्यावरण में हम
अब शहरों में पेड़ हमें पार्क, बड़ी सोसाइटी के लॉन या सार्वजनिक जगहों पर मिलेंगे। पिछले कुछ वर्षों में शहर में सुंदरता के नाम पर फुटपाथ पक्के किए जा रहे हैं, नालियों को पाटा जा रहा है। अपने घरों में लोग गेट तक फर्श पक्का करवा रहे हैं जिससे घर में मिट्टी नहीं आए, पेड़ों से पत्ते नहीं गिरें।
Read moreआखिर बड्डाल में ‘क्लोरफेनापायर कहाँ से आया ?
हालांकि एट्रोपिन का इस्तेमाल ऑर्गेनोफॉस्फोरस विषाक्तता के लिए एक मारक है, लेकिन आश्चर्यजनक यह है कि किसी भी बीमार या मारे गए लोगों के शरीर में ऑर्गेनोफॉस्फोरस विषाक्तता के कोई लक्षण दिखे नहीं । अब मौत का कारण जिस क्लोरफेनापायर को कहा जा रहा है , उसका यहाँ दूर दूर तक कोई इस्तेमाल करता नहीं ।
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