पंकज चतुर्वेदी दिल्ली में बगैर किसी अनुमति के हर घंटे औसतन पांच पेड़ काटे जा रहे हैं, वह भी बगैर किसी वैधानिक अनुमति के। दिल्ली […]
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समाज को उजाड़ कर बस ना पाएगी लोकतक झील
पंकज चतुर्वेदी देश को मणिपुर की चिंता तब ही होती है जब वहाँ से कोई हिंसा की बात हो लेकिन इस राज्य का अस्तित्व और […]
Read moreबगैर डल झील के कैसे जिएगा श्रीनगर ?
पंकज चतुर्वेदी अभी 08 मई को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एन.जी.टी.) ने कश्मीर में डल झील की ‘बिगड़ती स्थिति’ पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जम्मू-कश्मीर […]
Read moreआखिर क्यों नहीं बन पाया तालाब प्राधिकरण?
पंकज चतुर्वेदी सन 2017 में उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन और भाजपा को विशाल बहुमत मिलने के अलग-अलग लोगों के अपने-अपने सरोकार बहुत थे, लेकिन […]
Read moreक्या स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव से भूमि की पुनर्बहाली भी सम्भव है?
© UNDP/Andrea Egan प्रशान्त महासागर के द्वीप समूह टोकेलाउ में फ़सलों के ऊपर सौर पैनल लगाए गए हैं, जिससे एक ही भूमि पर खाद्य उत्पादन और […]
Read moreआपदाओं व संकटों में पत्रकारिता की अहमियत: यूएन रिपोर्ट
© UN News ग़ाज़ा में युद्ध के प्रभावों की रिपोर्टिंग करते फ़लस्तीनी पत्रकार. (फ़ाइल फ़ोटो) संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, आपदाओं के दौरान स्वतंत्र […]
Read moreउत्तराखंड के चमोली जिले में विष्णुगाड–पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टेल रेस टनल (TRT) में 13 अगस्त 2026 की शाम को अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा घुस आया, जिससे दर्जनों मजदूर फंस गए और कई की मौत हो गई। हिमालय क्षेत्र में विकास के नाम अपर सुरंगे खोदने से लगातार आब्दि दुर्घताने हो रही हैं । आई आई टी, इसरो आदि के शोध चेतावनी दे रहे हैं कि हिमालय को खड़ना खतरे से खाली नहीं । इसके बावजूद ऐसे निर्माण हो रहे हैं । यह लेख इसी मुद्दे पर है
हिमालय की छाती चीरती सुरंगे और मौत का बढ़ता साया पंकज चतुर्वेदी लगता है हम अतीत के अनुभवों से कुछ सीखने को तैयार नहीं हैं, […]
Read moreअत्यधिक खनन से नदियों पर संकट
रोहित कौशिक क्या वास्तव में नदियों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं या फिर समय के प्रभाव से नदियों के स्वरूप में परिवर्तन […]
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