“मानव ने हमेशा से ही बाघ को वीरता और देवत्व भाव से देखा है, हमारी मान्यताओं में वह आदिशक्ति का वाहक है। वहीं बाघों ने […]
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सांप बचेगा को धरती बचेगी
हर जीव, जंतु प्रकृति के अस्तित्व के लिए अनिवार्य हैं पंकज चतुर्वेदी आदिकाल में मनुष्य जिससे डरा, जिससे उपकारित हुआ , उन सभी को पूजने […]
Read moreमानव और प्रकृति के बीच हों गूढ़ सह-संबंध
विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस सुनील कुमार पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण आज के समय में बहुत ही आवश्यक हो गया है, क्यों कि आज […]
Read moreजलवायु परिवर्तन और मानव व्यक्तित्व
ऊँचाई, मस्तिष्क विकास और मानसिक स्वास्थ्य पर वैज्ञानिक प्रभाव अजय सहाय वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) केवल पृथ्वी के भौतिक परिवेश को ही […]
Read moreविकास बनाम विनाश: हसदेव से हैदराबाद तक पेड़ कटाई
ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरणीय आपदा का वैज्ञानिक विश्लेषण अजय सहाय छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खनन के नाम पर 3,68,217 पेड़ों के काटे […]
Read moreकुछ देर को बत्ती बुझा दो न !
कृत्रिम प्रकाश की उपस्थिति में, जुगनुओं को तेज रोशनी करने की कोशिश में पंकज चतुर्वेदी पिछले महीने महाराष्ट्र के पुरुषवाड़ी , भंडारदरा , राजमाची , प्रबलमाची ,कर्जत जैसे स्थानों […]
Read moreशहरी बाढ़ बनाम वर्षा जल प्रबंधन
वैश्विक सर्वोत्तम मॉडल के साथ भारत के लिए वैज्ञानिक समाधान अजय सहाय वर्ष 2025 में भारत के विभिन्न महानगरों जैसे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, […]
Read moreआस्था से जल संरक्षण तक
भारत के धार्मिक स्थलों पर जल पुनर्भरण और रीसायक्लिंग की वैज्ञानिक क्रांति अजय सहाय भारत के धार्मिक स्थलों पर जल का उपयोग एक पवित्र अनुष्ठान […]
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