Category: Rivers and Lakes (नदियाँ और झीलें)

जल का सही प्रबंधन

जल का सही प्रबंधन ही जलस्वराज की ओर बढ़ने का रास्ता है…

विकास परसराम मेश्राम जल जीवन का मूलभूत तत्व है। यह पृथ्वी पर सभी जीवों के लिए अनिवार्य है। हालांकि, बढ़ती जनसंख्या और अनियंत्रित विकास के […]

Read more
बाढ़ खलनायक नहीं होती !

बाढ़ खलनायक नहीं होती !

पंकज चतुर्वेदी साल के दस महीने लाख मिन्नतों के बाद जब आसमान से जीवनदाई बरसात का आशीष मिलता है तो भारत का बड़ा हिस्सा इससे […]

Read more
जलवायु परिवर्तन

जलवायु परिवर्तन और जल संकट पर प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण ही एकमात्र समाधान

विकास परसराम मेश्राम जल संकट केवल हमारे देश की ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की समस्या है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, आज दुनिया की 26 […]

Read more

बाढ़, फैलाव और अविरलता से ही निर्मल होगी दिल्ली में यमुना

पंकज चतुर्वेदी सावन बीत गया , भादों भी आधा निकल गया दिल्ली और उसके आसपास यमुना नदी के जल-ग्रहण  क्षेत्र कहलाने वाले इलाकों में पर्याप्त […]

Read more
फोटो - गूगल

पानी की किल्लत से कराह रही दिल्ली

दिल्ली को सालाना ही पीने के पानी की किल्लत से दो – चार होना पड़ता है। पीने के पानी के लिए पानी के टेंकर पर लंबी – लंबी लाइन लगानी पड़ती हैं।

Read more
यमुना नदी

नदी

सरिता, नदी, तरंगिनि, तटिनी और न जाने क्या क्या नामों से हम प्रकृति के इस जलप्रवाह रूप को जानते है। नदियां अपने आप में चिंतन का विषय हैं।

Read more
फोटो - गूगल

हमारे अस्तित्व से जुड़ा है जल प्रबंधन

भारत को 6 जलक्षेत्रों (इसे मैं जल राज्य कहूंगा) में विभाजित किया है और सीमाओं का निर्धारण कर डिजिटल मैप विकसित किए हैं। इन 6 जल क्षेत्रों को 37 बेसिन, 117 कैचमेंट एरिया, 588 सबकैचमेंट एरिया, 3854 वाटरशेड, 49618 सब-वाटरशेड और कुल 3 लाख 21 हजार 324 माइक्रोवाटरशेड में बांटकर हर एक का जमीनी चिन्हांकन करके उसका एक यूनिक नेशनल कोड जारी किया है।

Read more
Photo - Google

मौसम पूर्वानुमान में अल-नीनो की भूमिका

भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक सन 1953 से 2023 के बीच कुल 22 ला नीना साल दर्ज किए गए हैं, जिसमें से सिर्फ दो बार यानी साल 1974 और 2000 के मॉनसून सीजन में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि बाकी सालों के मॉनसून में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है।

Read more
फोटो - गूगल

अस्तित्व के लिए जूझती द्रव्यवती नदी

साल 1981 के जुलाई माह में आई बाढ़ में द्रव्यवती नदी का अस्तित्व बह गया था। बची-कुची कसर अतिक्रमण विकास और प्रदूषण ने पूरी करदी और द्रव्यवती कब अमानीशाह नाला में बदल गई पता नही चला। आज द्रव्यवती को लोग इसके नाम से नहीं बल्कि अमानीशाह के नाले के नाम से जानते हैं।

Read more
फोटो - गूगल

भुला दी गई नदियों ने भयावह बना दिया वायनाड का दर्द

वायनाड – नीलगिरी पर्वतमाला के इन ऊंचे पहाड़ों से कभी एक नदी बहती थी । तेज गति वाली नदी जो गर्मी में भले उदास सी दिखती लेकिन बरसात के छह महीने तेज वेग में नीचे की तरफ जाती और पश्चिमी घाट की नदियों के संजाल में मिल जाती ।

Read more
Photo - Google

राजधानी दिल्ली में यमुना आईसीयू में यमुना सफाई के दावे कागजी

यमुना नदी में प्रदूषण की स्थिति एक बार फिर से सुर्खियों में है। हाल ही में आई भारी बरसात के बाद भी यमुना साफ नहीं दिख रही है। जुलाई 2024 में यमुना में सफेदी की खबरें एक बार फिर से सामने आई हैं, जिससे पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है।

Read more
फोटो - गूगल

सी पी सी बीः संकट में देश की नदियाँ

देश की नदियां इस समय बेहद संकट के दौर से गुजर रही हैं , केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने  देश के सभी नदियों की स्थित पर नवंबर 2022 में एक विस्तृत  रिपोर्ट  जारी की थी । यहाँ इस रिपोर्ट को देखा जा सकता है ।

Read more

फिर पानी के प्रति इतनी बेपरवाही क्यों ?

पानी पीने के अलावा शौच, स्नान, कपड़े धोना, खाना बनाना, साफ-सफाई करना और अपने वाहनों को धोना आदि कामों में इस्तेमाल  किया जाता है। पानी के बगैर जिंदगी की कल्पना नहीं की जा सकती ।

Read more
फोटो - गूगल

मानसून जीवन पर्व है

भारतीय मानसून का संबंध मुख्यतया  गरमी के दिनों  में होने वाली वायुमंडलीय परिसंचरण में परिवर्तन से है। गरमी की शुरूआत होने से सूर्य उत्तरायण हो जाता है। सूर्य के उत्तरायण के साथ -साथ अंतःउष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र का भी उत्तरायण होना प्रारंभ हो जाता है इसके प्रभाव से पश्चिमी जेट स्ट्रीम हिमालय के उत्तर में प्रवाहित होने लगती है। इस तरह तापमान बढने से निम्न वायुदाब निर्मित होता है।

Read more