हिमाचल प्रदेश एक पर्वतीय राज्य होने के कारण पुष्प और जीव-जन्तु जैव विविधता से समृद्ध है। आदिवासी और राज्य के दूरदराज के क्षेत्रों में अच्छे औषधीय और सुगंधित पुष्प संसाधन हैं जो उनकी आजीविका में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं । बदलती जलवायु के साथ कई प्रजातियाँ या तो विलुप्त होने की समस्या का सामना कर रही हैं । जो लोग ऐसे संसाधनों पर खुशहाली और आजीविका का भरोसा करते हैं, बढ़ते तापमान के कारण उनके स्वास्थ्य, पर असर पड़ रहा है । हम हिमालय को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं क्योंकि यह हमें जैविक ऊर्जा प्रदान करता है संसाधन और बुनियादी सामान जैसे भोजन, फाइबर, दवा, लकड़ी, ईंधन लकड़ी आदि । यह लेख/रिपोर्ट इसी पर आधारित है ।
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- नेपाल में ग्लेशियर झील फटने से हुई तबाही ने भारत को सतर्क आकर दिया है । हिमालय पर्वत की गोद में बीएसई आठ राज्यों में ग्लेशियर के पिघलने- झीलें बनने ने चुनोटी खड़ी कर दी है । ऐसे में जरूरी है की हमारे देश में ग्लेशियर विकास प्राधिकरण की तरह कोई संस्था गठित हो, जो ग्लेशियर के खतरों को ले कर काम कर रही अलग अलग बहुत सी संसतहों के आँकड़े, आकलन यदि को एकीकृत रूप से निदान के साथ पेश कर सके । यह लेख इसी मुद्दे पर है ।