यह तो जान लें कि उनकी जरूरत क्या है ? पंकज चतुर्वेदी देश का अन्नपूर्णा बीते कई दशकों की सबसे भयावह बाढ़ से जूझ रहा […]
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नमामि गंगे से आगे
गंगा को जीवित माँ का संवैधानिक दर्ज़ा क्यों आवश्यक अजय सहाय गंगा नदी को भारत की आत्मा और संस्कृति की धुरी कहा जाता है, जिसे […]
Read moreचीन का वेस्टर्न वॉटर डाइवर्ज़न मॉडल और भारत का थार
मरुस्थलीकरण से जल–आत्मनिर्भरता तक की दूरदर्शी दिशा अजय सहाय भारत एक विशाल भूगोल वाला देश है जिसकी नदियाँ, जलवायु और पारिस्थितिकी अत्यंत विविधतापूर्ण हैं; पूर्वोत्तर […]
Read moreजलवायु परिवर्तन: पिघलते ग्लेशियर व बारिश ने 11,113 नदियों को बनाया खतरनाक
एशिया की जीवनरेखा पर संकट हिमालय, तिब्बत और पामीर क्षेत्र की 11,113 नदियों में जल प्रवाह तेजी से बढ़ा है। अध्ययन में पाया गया कि […]
Read moreहिमालय की चेतावनी: नदी-नालों से दूरी बनाएँ, जीवन बचाएँ
क्लाउडबर्स्ट, जल प्रवाह और आपदा प्रबंधन पर वैज्ञानिक और नीतिगत विश्लेषण अजय सहाय भारत के हिमालयी, अरावली, नीलगिरी, पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट जैसे पर्वतीय […]
Read moreजल उफान की चेतावनी: 2025-26 में नदियों के कहर के पीछे वैज्ञानिक विश्लेषण
मानवजनित कारण और भारत की जल आत्मनिर्भरता की दिशा में समाधान अजय सहाय 2025-26 के वर्षा ऋतु में भारत की अधिकांश बड़ी और छोटी नदियों […]
Read moreगंगा जल की वैज्ञानिक शुद्धता
बैक्टीरियोफेज वायरसों की अद्वितीयता और आत्मशुद्धिकरण क्षमता का रहस्य अजय सहाय गंगा नदी का जल धार्मिक आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ वैज्ञानिक रूप से […]
Read moreगंगोत्री ग्लेशियर, जल गुणवत्ता और गंगा नदी का भविष्य
वैज्ञानिक विश्लेषण, BOD–DO संतुलन और जल संकट की चुनौती अजय सहाय गंगोत्री ग्लेशियर, जो उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित है, गंगा नदी का प्रमुख […]
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