Tag: #पर्यावरण

जलवायु परिवर्तन की मूल अवधारणाओं को सीखेंगे अन्ना विश्वविद्यालय के छात्र

जलवायु परिवर्तन की मूल अवधारणाओं को सीखेंगे अन्ना विश्वविद्यालय के छात्र

जलवायु परिवर्तन की मूल अवधारणाओं को सीखेंगे अन्ना विश्वविद्यालय के छात्र अन्ना विश्वविद्यालय ने स्नातक (यूजी) छात्रों को जलवायु अनुकूल विकास कार्यक्रम के तहत जलवायु […]

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जलवायु परिवर्तन: तापमान में दो डिग्री वृद्धि तो बढ़ेंगे कीट, गेहूं की 46% और धान की 19 फीसदी पैदावार घटेगी

जलवायु परिवर्तन: तापमान में दो डिग्री वृद्धि तो बढ़ेंगे कीट, गेहूं की 46% और धान की 19 फीसदी पैदावार घटेगी

तापमान में दो डिग्री वृद्धि तो बढ़ेंगे कीट, गेहूं की 46% और धान की 19 फीसदी पैदावार घटेगी अगर तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस की […]

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धरती का तापमान बढ़ा रहीं हैं ग्रीन हाउस गैसें !

धरती का तापमान बढ़ा रहीं हैं ग्रीन हाउस गैसें !

सुनील कुमार महला उत्तर भारत में गर्मी अभी से कहर बरसाने लगी है जबकि अभी अप्रैल माह की शुरुआत ही हुई है। पाठकों को बताता […]

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पर्यावरण संरक्षण, लैंगिक समानता और हमारी सांस्कृतिक विरासत को संजोकर रख रहा राजसमंद का अनूठा गांव पिपलांत्री !

पर्यावरण संरक्षण, लैंगिक समानता और हमारी सांस्कृतिक विरासत को संजोकर रख रहा राजसमंद का अनूठा गांव पिपलांत्री !

सुनील कुमार महला पेड़ हमारे पर्यावरण, हमारे पारिस्थितिकी तंत्र,मानव व धरती के समस्त प्राणियों, वनस्पतियों को बनाए रखने के लिए बहुत आवश्यक है। कहना ग़लत […]

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गर्मी में भी घुट रही हैं दिल्ली की सांसें

गर्मी में भी घुट रही हैं दिल्ली की सांसें

पंकज चतुर्वेदी पंजाब के सुदूर गाँव की रहने वाली इस युवती ने  हिन्दी में पी एचडी किया और दिल्ली के प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्थान में काम […]

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लू से निबटने को कमर कसना होगा

लू से निबटने को कमर कसना होगा

लू अर्थात हीट वेव आमतौर पर रुकी हुई हवा की वजह से होती है। उच्च दबाव प्रणाली हवा को नीचे की ओर ले जाती है। यह शक्ति जमीन के पास हवा को बढ़ने से रोकती है।

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बदलते पर्यावरण में हम

बदलते पर्यावरण में हम

अब शहरों में पेड़ हमें पार्क, बड़ी सोसाइटी के लॉन या सार्वजनिक जगहों पर मिलेंगे। पिछले कुछ वर्षों में  शहर में सुंदरता के नाम पर फुटपाथ पक्के किए जा रहे हैं, नालियों को पाटा जा रहा है। अपने घरों में लोग गेट तक फर्श पक्का करवा रहे हैं जिससे घर में मिट्टी नहीं आए, पेड़ों से पत्ते नहीं गिरें।

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आखिर बड्डाल में 'क्लोरफेनापायर  कहाँ से आया  ?

आखिर बड्डाल में ‘क्लोरफेनापायर  कहाँ से आया  ?

हालांकि एट्रोपिन का इस्तेमाल ऑर्गेनोफॉस्फोरस विषाक्तता के लिए एक मारक है, लेकिन आश्चर्यजनक यह है कि किसी भी बीमार या मारे गए लोगों के शरीर में ऑर्गेनोफॉस्फोरस विषाक्तता के कोई लक्षण दिखे नहीं ।   अब मौत का कारण जिस क्लोरफेनापायर को कहा जा रहा है , उसका यहाँ दूर दूर तक कोई इस्तेमाल करता नहीं ।

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