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हालांकि इस बार अल नीनो के कारण भारत में बरसात का पेटर्न अनियमित है , बहुत से हिस्सों में बरसात कम हुई लेकिन जहँ भी बरसात हुई वहाँ बाढ़ ने जनजीवन को प्रभावित  किया । यह लेख बाढ़ के बढ़ते दायरे, उसके कारण आदि पर हैं । 

विशेष संपादकीय लेख | जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाएं      पंकज चतुर्वेदी बाढ़ का बढ़ता दायरा: कारण, विभीषिका और बचाव के उपाय: इस बार भले ही […]

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हिमालयी आपदा राहत केंद्र : “समय कम है—जीवन बचाना सर्वोच्च लक्ष्य”

अजय सहाय हिमालय युवा वलित पर्वत प्रणाली है। तीखी ढाल, भूकंपीय सक्रियता, कमजोर एवं दरारयुक्त चट्टानें, हिमनद, हिमनदीय झीलें, अत्यधिक वर्षा, बादल फटना, भूस्खलन और […]

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जलवायु परिवर्तन की मार से बेहाल सागर

पंकज चतुर्वेदी भारत सरकार के पृथ्वी-विज्ञान मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र बहुत अधिक प्रभावित हो रहे हैं। समझना होगा  कि  […]

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उत्तराखंड का हिमालय…

अजय सहाय उत्तराखंड का हिमालय आज जलवायु परिवर्तन, पीछे हटते हिमनदों, बढ़ती हिमनदीय झीलों, अत्यधिक वर्षा, बादल फटने, भूस्खलन और मलबा-प्रवाह जैसे कई खतरों का […]

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बढती हरियाली, घटते जंगल हर हरियाली जंगल नहीं होती

पंकज चतुर्वेदी दिल्ली में बगैर किसी अनुमति के हर घंटे औसतन पांच पेड़ काटे जा रहे हैं, वह भी बगैर किसी वैधानिक अनुमति के। दिल्ली […]

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समाज को उजाड़ कर बस ना पाएगी लोकतक झील

पंकज चतुर्वेदी देश को मणिपुर की चिंता तब ही होती है जब वहाँ से कोई हिंसा की बात हो लेकिन इस राज्य का अस्तित्व और […]

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बगैर डल झील के कैसे जिएगा श्रीनगर ?

पंकज चतुर्वेदी अभी 08 मई को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एन.जी.टी.) ने कश्मीर में डल झील की ‘बिगड़ती स्थिति’ पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जम्मू-कश्मीर […]

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आखिर क्यों नहीं बन पाया तालाब प्राधिकरण?

पंकज चतुर्वेदी सन 2017 में उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन और भाजपा को विशाल बहुमत मिलने के अलग-अलग लोगों के अपने-अपने सरोकार बहुत थे, लेकिन […]

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