अरावली को बचाने वालों से आज तक कभी भी कोई रिपोर्ट तैयार करने वाला नहीं मिला। जलपुरुष राजेन्द्र सिंह जी अरावली क्षेत्र में 1980 के […]
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अरावली के उजड़ने से गहरा रही है जलवायु परिवर्तन की मारः पंकज चतुर्वेदी
अध्ययन के परिणामों से पता चला है कि 1975 से 2019 के बीच अरावली की 3676 वर्ग किमी भूमि बंजर हो गई । इस अवधी में अरावली के वन क्षेत्र में 5772। 7 वर्ग किमी (7। 63 प्रतिशत) की कमी आई है । यदि यही हाल रहे तो 2059 तक कुल 16360। 8 वर्ग किमी (21। 64 प्रतिशत) वन भूमि पर कंक्रीट के जंग उगे दिखेंगे ।
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