एक वैज्ञानिक विश्लेषण अजय सहाय भारत एक ऐसा देश है जहां औसत वार्षिक वर्षा 4000 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) होती है, परंतु लगभग 1869 BCM […]
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जल आत्मनिर्भर भारत 2047 की दिशा में पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण
भारत में पारंपरिक जल स्रोतों का महत्व अत्यंत प्राचीन और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध है अजय सहाय भारत में पारंपरिक जल स्रोतों का महत्व अत्यंत […]
Read moreग्लेशियर जल का भूमिगत जल रिचार्ज में योगदान
ग्लेशियर जल का भूमिगत जल रिचार्ज में योगदान अजय सहाय ग्लेशियर जल का भूमिगत जल रिचार्ज में योगदान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, विशेषकर भारत जैसे […]
Read moreराष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान रुड़की
हिंदी में तकनीकी पुस्तक लेखन पुरस्कार योजना वर्ष 2024 जल शक्ति मंत्रालय, जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के […]
Read moreभोजन की बर्बादी से बर्बाद होते भूमि, जल, श्रम, ऊर्जा और अन्य इनपुट !
सुनील कुमार महला भारतीय सनातन संस्कृति में कहा गया है कि अन्न ही ‘ब्रह्म ‘ है, क्यों कि अन्न से ही समस्त प्राणी उत्पन्न होते […]
Read more“ईश्वर” बताएगा पानीदार सोते-झरने का हाल
उत्तराखंड में सदियों से लोगों की प्यास बुझाते प्राकृतिक जल स्रोत अब खुद प्यासे हो रहे हैं. पहाड़ों से निकलकर शहरों तक पहुंचने वाले स्वच्छ और […]
Read moreजल-माता का आशीष
यदि एक दिन और पानी नहीं बरसा तो गाँव छोड़ कर ही जाना होगा . बात 1998 की है . कम बरसात, रेगिस्तान के लिए […]
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