प्राकृतिक असंतुलन और मानवीय हस्तक्षेप ने मिलकर भारत में बाढ़ के जोखिम को लगातार गहरा किया है। यह वार्षिक आपदा अब सामाजिक-आर्थिक क्षति का प्रमुख […]
Read moreCategory: जल भराव
कहकशां नहीं, कहर है बारिश का
प्रकृति का उग्र चेहरा सुनील कुमार महला मानव की इच्छाओं का कोई अंत नहीं है और आज मानव अपनी इच्छाओं, लालच और सुविधाओं की अंधी […]
Read moreजलकुंभी संकट
भारत की आर्द्रभूमियों पर सबसे बड़ा आक्रांता पौधा और उसका वैज्ञानिक-कानूनी समाधान अजय सहाय भारत में जलकुंभी (Eichhornia crassipes) का संकट पिछले 120 वर्षों से […]
Read moreपंजाब बाढ़ राहत
यह तो जान लें कि उनकी जरूरत क्या है ? पंकज चतुर्वेदी देश का अन्नपूर्णा बीते कई दशकों की सबसे भयावह बाढ़ से जूझ रहा […]
Read moreबाढ़ – प्राकृतिक आपदा या मानवजनित त्रासदी ?
बरसात, जो कभी वरदान कहलाती थी सुनील कुमार इस साल देशभर में बारिश बहुत ज्यादा कहर मचा रही है। जगह-जगह तबाही का आलम है।बरसात, जो […]
Read moreक्लाउडबर्स्ट घटनाएँ और चरम वर्षा पैटर्न
जलवायु परिवर्तन के वैज्ञानिक कारण, आँकड़े और समाधान अजय सहाय क्लाउडबर्स्ट या बादल फटना एक ऐसी विनाशकारी घटना है जिसमें सीमित क्षेत्र (आमतौर पर 20–30 […]
Read moreजलवायु में बदलाव के दौर में भयावह होता बादलों का फटना
हिमाचल प्रदेश में बादल फटे, कुछ घटनाएँ कश्मीर से भी पंकज चतुर्वेदी मॉनसून के मौसम में हिमालयी राज्यों के लिए बादल फटना कोई नई घटना […]
Read moreमानसून डराता नहीं , हकीकत उजागर करता हैं
क्या नदी, नहर, तालाब झील आदि पानी के स्त्रोत ? पंकज चतुर्वेदी हाल ही में एक समाचार देखा जिसमें बिहार के एक जिला मुख्यालय में […]
Read moreदलदली बाढ़ मैदान
प्राकृतिक कार्बन सिंक की पुनर्बहाली से 39% उत्सर्जन कटौती की ओर अजय सहाय वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में जलवायु परिवर्तन और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन ने […]
Read moreबादलों के घर कहे जाने वाले मेघालय में 1 जून से 5 जुलाई तक 48 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई
सामान्य औसत 873.1 मिमी की तुलना में केवल 453.3 मिमी हुई है वर्षा मेघालय में चालू मानसून के दौरान कम वर्षा दर्ज की गई। जबकि […]
Read moreजलवायु परिवर्तन का असर: कम समय में ज्यादा बारिश अब ‘न्यू नॉर्मल’
मानसून का मिजाज बदला, अब जून में ही ‘चौमासे’ की चौथाई वर्षा जलवायु परिवर्तन से मानसून का पैटर्न बदल रहा है। देश के उत्तर-पूर्वी राज्य […]
Read moreऐसे शहर तो डूबेंगे ही
मौसम की बरसात के शुरुआत में ही दरिया बन गए पंकज चतुर्वेदी देश के वे शहर जो कि हमारी प्रगति के प्रतिमान हुआ करते हैं […]
Read moreमानसून की बारिश के असमान वितरण से कई जिलों में भारी तबाही
मौसम पर हावी जलवायु परिवर्तन… कहीं ज्यादा तो कहीं बहुत कम बारिश जलवायु परिवर्तन स्थानीय मौसम पर भी हावी होता दिखाई दे रहा है। जून […]
Read moreऐसी दिल्ली को तो डूबना ही था
बमुश्किल एक घंटे की बरसात में ही दिल्ली ठिठक गई पंकज चतुर्वेदी इस बार बीते डेढ़ महीने में राजधानी दिल्ली पर कुल चार बार ठीकठाक […]
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