Category: Environment (पर्यावरण )

मीठे पानी के घटते भंडार: ‘नई जल वास्तविकता के लिए तैयार रहें देश’ – WMO

© WMO/Leonor Hernandez अर्जेंटीना के एल कैलाफ़ाते में पेरितो मोरेनो हिमनद. जलवायु और पर्यावरण संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी ने गुरुवार को चेतावनी दी कि दुनिया […]

Read more
घटिया कोयला: कम बिजली, अधिक राख

घटिया कोयला: कम बिजली, अधिक राख

पंकज चतुर्वेदी देश के ताप बिजली घरों में एक पुरानी लेकिन लगातार गहराती समस्या फिर सुर्खियों में है — बॉयलर में जितना कोयला झोंका जाता […]

Read more
हिमालय पर्वत की गोद में बीएसई आठ राज्यों में ग्लेशियर के पिघलने- झीलें बनने ने चुनोटी खड़ी कर दी है ।

नेपाल में ग्लेशियर झील फटने से हुई तबाही ने भारत को सतर्क आकर दिया है । हिमालय पर्वत की गोद में बीएसई आठ राज्यों में ग्लेशियर के पिघलने- झीलें बनने ने चुनोटी खड़ी कर दी है । ऐसे में जरूरी है की हमारे देश में ग्लेशियर विकास प्राधिकरण की तरह कोई संस्था गठित हो, जो ग्लेशियर के खतरों को ले कर काम कर रही अलग अलग बहुत सी संसतहों के आँकड़े, आकलन यदि को एकीकृत रूप से निदान के साथ पेश कर सके । यह लेख इसी मुद्दे पर है । 

पंकज चतुर्वेदी पिछले कुछ वर्षों में जब भी उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश या नेपाल के किसी दूरदराज गांव से अचानक आई बाढ़ की खबर आती है, […]

Read more

“प्रकृति की सीमा तोड़ता विकास: मंदाकिनी–शिप्रा का जलप्रलय हमें क्या सिखा रहा है?”

अजय सहाय चित्रकूट की मंदाकिनी नदी का अगस्त 2026 में अचानक विकराल हो जाना केवल एक स्थानीय बाढ़ की घटना मानकर भुला देना बड़ी भूल […]

Read more

हिमालय का अलार्म: 100 मिमी बारिश और 100 किमी तक मलबे का सफर—क्या हमारी हिमालयी आपदा नीति तैयार है?

अजय सहाय हिमालयी राज्यों में आपदा-प्रबंधन की नीति को अब केवल यह देखकर नहीं बनाया जा सकता कि किसी नदी में सामान्य दिनों में कितना […]

Read more

नेपाल की ताजा त्रासदी भारतीय उपमहाद्वीप में हिमालय की गोद में बसे राज्यों में गल रहे ग्लेशियर और उससे बन रही झीलों को ले कर बड़ी चेतावनी हैं । इंसभी की निगरानी और उनको फटने से रोकने के लिए त्वरित ढोस योजनाओं की जरूरत है । यह लेख इन्हीं वैज्ञानिक तथ्यों पर है 

हिमालय की चेतावनी: पिघलती बर्फ, प्रदूषित झीलें पंकज चतुर्वेदी नेपाल की इस ताज़ा आपदा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हिमालय अब और अधिक मानवीय […]

Read more

हरी घास, खुले मैदान: क्यों अहम हैं चरागाह

© UNDP मध्य एशिया का अराल सागर अब लगभग सूख चुका है.  जलवायु और पर्यावरण उत्तरी केनया में एक पशुपालक बारिश के इन्तज़ार में आसमान पर […]

Read more

आईआईटी खड़गपुर के शोधकर्ताओं ने अठारह सौ इक्यासी से लेकर वर्ष दो हजार पच्चीस तक के छत्तीस हजार से अधिक भूकंपीय आंकड़ों का वैज्ञानिक और सांख्यिकीय विश्लेषण करके एक विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया है। इस अध्ययन से यह बात सामने आई है कि अंडमान के नीचे सक्रिय टेक्टोनिक प्लेटों की सीमाओं के बीच लगातार जबरदस्त घर्षण और दबाव बढ़ रहा है। शोध के अनुसार, इस क्षेत्र में भविष्य में आठ या उससे अधिक तीव्रता के विनाशकारी भूकंप आने की आशंका बहुत अधिक है। ऐसे स्थान पर भारी निर्माण कार्य बड़ी तबाही ला सकते हैं , वैसे भी अंडमान निकोबार जलवायु परिवर्तन को ले लार बेहद संवेदनशील है – यह लेख इसी विषय  

पर है   साथ में रिसर्च पेपर भी है  भूकंप से काँपते अंडमान में निर्माण कार्य तबाही लाएंगे पंकज चतुर्वेदी भारत का बंगाल की खाड़ी और […]

Read more