Category: Environment (पर्यावरण )

अरावली मां के स्तन काटकर बेचने वाले अपराधी हैं

अरावली मां के स्तन काटकर बेचने वाले अपराधी हैं

मां तो हमारा पोषण करती है, हमें जीवन विद्या देकर जीने योग्य बनाती है। लालची बनकर माई से कमाई करने वालों को छोड़कर, अरावली बचाने […]

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वेटलैंड: जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध धरती की अंतिम प्राकृतिक ढाल

वेटलैंड: जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध धरती की अंतिम प्राकृतिक ढाल

यदि धरती को जलवायु परिवर्तन से बचाना है, तो वेटलैंड बचाना अनिवार्य है अजय सहाय वेटलैंड—जिन्हें धरती के “किडनी”, “कार्बन-सिंक” और “प्राकृतिक जल-टैंक” के रूप […]

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असमय बारिश होने से फसलों में नए रोग लगने की आशंका बढ़ी

असमय बारिश होने से फसलों में नए रोग लगने की आशंका बढ़ी

जलवायु परिवर्तन ने सब्जी व अनाज के रोग बदले जलवायु परिवर्तन ने इंसानों के साथ सूक्ष्म जीवों और कीटों की दुनिया में भी उथलपुथल मचा […]

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दिल्ली की हवा में ज़हर: दमघोंटू प्रदूषण और सिमटती ज़िंदगी

दिल्ली की हवा में ज़हर: दमघोंटू प्रदूषण और सिमटती ज़िंदगी

दिल्ली-एनसीआर में 15 दिसंबर 2025 सोमवार को जहरीले स्मॉग की परत छाई रही। सुनील कुमार महला सर्दी का मौसम शुरू होने के साथ ही दिल्ली […]

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अरावली को न्याय दिलाने हेतु जन अभियान

अरावली को न्याय दिलाने हेतु जन अभियान

भारत की राजधानी दिल्ली से गुजरात तक 692 किलोमीटर लंबी आड़ी  पर्वतमाला अरावली जलपुरुष राजेंद्र सिंह भारत के एक उद्योगपति हेतु सब कुछ संभव हो […]

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2047 तक सुरक्षित पेयजल में 25% वृद्धि भारत का वैज्ञानिक और वैश्विक विज़न

2047 तक सुरक्षित पेयजल में 25% वृद्धि

भारत का वैज्ञानिक और वैश्विक विज़न अजय सहाय दुनिया में पानी बहुत है लेकिन पीने योग्य पानी बहुत कम है क्योंकि पृथ्वी के पूरे जल […]

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© UNICEF/Sultan Mahmud Mukut बांग्लादेश में भी हाल के वर्षों में, बारिश और बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है।

जलवायु शिखर सम्मेलन 2025: COP30 की ओर बढ़ते क़दम

दक्षिण एशिया में बाढ़, उत्तरी अमेरिका में जंगल की आग और योरोप में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने वैज्ञानिकों की वर्षों पुरानी चेतावनी को और पुख़्ता […]

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नदियों के संरक्षण और स्वच्छता में स्त्रियों की भूमिका

नदियों के संरक्षण और स्वच्छता में स्त्रियों की भूमिका

नदियों के निकट की उर्वर भूमि, जल की निरंतर उपलब्धता, प्राकृतिक संपदा और संसाधन डॉ विभा नायक, दिल्ली विश्वविद्यालय नदियाँ किसी भी संस्कृति का प्राण […]

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