नकली बादल से झील भरने के लिए देश-विदेश की कम्पनियाँ बुला लीं। पंकज चतुर्वेदी जयपुर से कोई 32 किलोमीटर दूर जमवा रामगढ़ की झील कभी […]
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पिघलते हिमालय और बनते वेटलैंड्स
जैव विविधता, आपदा और जल आत्मनिर्भरता की चुनौती अजय सहाय हिमालयी क्षेत्र को विश्व की “तीसरी ध्रुवीय पट्टी” कहा जाता है क्योंकि यहाँ 9,575 से […]
Read moreपंजाब बाढ़ राहत
यह तो जान लें कि उनकी जरूरत क्या है ? पंकज चतुर्वेदी देश का अन्नपूर्णा बीते कई दशकों की सबसे भयावह बाढ़ से जूझ रहा […]
Read moreउष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में वनों की कटाई
हर साल लगभग 28,000 से 28,330 अतिरिक्त मौतें ! सुनील कुमार महला वन जीवन का मुख्य आधार व प्रकृति का खज़ाना हैं।जंगल केवल कार्बन स्टोर […]
Read moreप्रकृति की ओर वापसी
जब एक युवा ने थामी प्राकृतिक खेती की डोर रोहित पराशर शहरों की चकाचौंध और भागदौड़ भरी जिंदगी को छोड़कर, कोई युवा अपने गाँव की […]
Read moreहिमालयी महाप्रलय
जलवायु परिवर्तन, चरम वर्षा और ग्लेशियर संकट का वैज्ञानिक विश्लेषण (2010–2025) अजय सहाय हिमालय जिसे “तीसरा ध्रुव” (Third Pole) कहा जाता है, इस शताब्दी की […]
Read moreखेती और ज़मीन, पहाड़ और खनन
भारत की पहचान उसके खेत और पहाड़ कपिल मेवाड़ा भारत की पहचान उसके खेत और पहाड़ हैं। खेती हमारी खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की […]
Read moreजलवायु परिवर्तन और भारतीय मत्स्य उद्योग का पतन
भारतीय मछुआरे घटती मछली संख्या और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों की दोहरी मार झेल रहे हैं, जो मछलियों को ठंडे और गहरे पानी की ओर […]
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