राजस्थान के बारां ज़िले में स्थित छबड़ा ब्लॉक को अधिकतर लोग छबड़ा थर्मल पावर प्लांट की वजह से जानते हैं। इस विशाल प्लांट को राज्य की बिजली […]
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गैरकानूनी नहीं, फिर भी बैन: एनालॉग पनीर पर उलझी सरकारें
पंकज चतुर्वेदी देश में एक अजीब विरोधाभास खुलकर सामने आया है। केंद्र सरकार की खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने एनालॉग पनीर को कभी गैरकानूनी […]
Read moreहरी घास, खुले मैदान: क्यों अहम हैं चरागाह
© UNDP मध्य एशिया का अराल सागर अब लगभग सूख चुका है. जलवायु और पर्यावरण उत्तरी केनया में एक पशुपालक बारिश के इन्तज़ार में आसमान पर […]
Read moreसांप बचेगा तो धरती बचेगी…
पंकज चतुर्वेदी आदिकाल में मनुष्य जिससे डरा, जिससे उपकारित हुआ , उन सभी को पूजने लगा . हमारी पूर्वज जानते थे कि हर जीव, जंतु […]
Read moreनाग पंचमी : प्रकृति के प्रति सम्मान और सह-अस्तित्व का पर्व।
-सुनील कुमार महला भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पर्व है-नाग पंचमी। इस वर्ष यानी कि वर्ष 2026 में नाग पंचमी का पावन पर्व 17 अगस्त […]
Read moreआईआईटी खड़गपुर के शोधकर्ताओं ने अठारह सौ इक्यासी से लेकर वर्ष दो हजार पच्चीस तक के छत्तीस हजार से अधिक भूकंपीय आंकड़ों का वैज्ञानिक और सांख्यिकीय विश्लेषण करके एक विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया है। इस अध्ययन से यह बात सामने आई है कि अंडमान के नीचे सक्रिय टेक्टोनिक प्लेटों की सीमाओं के बीच लगातार जबरदस्त घर्षण और दबाव बढ़ रहा है। शोध के अनुसार, इस क्षेत्र में भविष्य में आठ या उससे अधिक तीव्रता के विनाशकारी भूकंप आने की आशंका बहुत अधिक है। ऐसे स्थान पर भारी निर्माण कार्य बड़ी तबाही ला सकते हैं , वैसे भी अंडमान निकोबार जलवायु परिवर्तन को ले लार बेहद संवेदनशील है – यह लेख इसी विषय
पर है साथ में रिसर्च पेपर भी है भूकंप से काँपते अंडमान में निर्माण कार्य तबाही लाएंगे पंकज चतुर्वेदी भारत का बंगाल की खाड़ी और […]
Read moreजलविहीन होते जलाशय,आखिर क्यों…………………………..?
अखण्ड प्रताप सिंह देश की राजनीति, खेल, जनसंख्या में अपना अहम स्थान रखनें वाला उत्तर प्रदेश तेजी से जलविहीन हो रहा है जिसका मूल कारण […]
Read moreअब दिखने लगा पर्यावरण पर बढ़ते तापमान का असर
रोहित कौशिक वैज्ञानिक कई वर्षों से यह चेतावनी दे रहे थे कि भविष्य में बढ़ते तापमान के कारण कई तरह के पर्यावरणीय बदलाव होंगे। […]
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