मिट्टी मानव जीवन का मूल आधार है। कहना ग़लत नहीं होगा कि हमारे भोजन, जल, वनस्पति तथा समस्त जीव-जगत का अस्तित्व मिट्टी पर ही निर्भर […]
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मूक जीवों के लिए करुणा का संकल्प: यह हमारी सनातन भारतीय संस्कृति का अहम् हिस्सा !
पूरी दुनिया में ग्लोबल वार्मिंग लगातार बढ़ती चली जा रही है और यह चिंताजनक बात है सुनील कुमार महला पूरी दुनिया में ग्लोबल वार्मिंग लगातार […]
Read moreमधुमक्खियां, मानव और प्रकृति : साझी जिम्मेदारी
इस पृथ्वी पर जीवन, खाद्य सुरक्षा, जैव- विविधता और पारिस्थितिक संतुलन की अत्यंत महत्वपूर्ण व अहम् कड़ी हैं सुनील कुमार महला प्रतिवर्ष 20 मई को […]
Read moreज्ञान, विज्ञान और मानवता का प्रकाश
16 मई अंतरराष्ट्रीय प्रकाश दिवस पर विशेष आलेख सुनील कुमार महला हर वर्ष 16 मई को अंतरराष्ट्रीय प्रकाश दिवस मनाया जाता है। पाठकों को बताता […]
Read moreमिथुन क्या है और अरुणाचल के जंगलों में इसे लेकर तनाव क्यों बढ़ रहा है?
ढोल मिथुनों का शिकार करने लगे हैं क्योंकि उनके आम शिकारों को इंसानों ने खत्म कर दिया है। इन हमलों में मिथुन खोने वाले किसान […]
Read moreहवा में घुला परागकणों का जहर
दिल्ली और आसपास के इलाकों में गर्मी की आहट के साथ ही हवा का मिजाज बदलने लगा है पंकज चतुर्वेदी मई महीने के पहले हफ्ते […]
Read moreअरावली की महानता ऊंचाई से नही-भौगोलिक, संस्कृति और आध्यात्मिकता से आंकी जाए
अरावली का महत्व उसमें पाए जाने वाले खनिज पदार्थ से भी बढ़ जाता है। पदम चंद गांधी अरावली पर्वतमाला दुनिया के प्राचीनतम वलित (फोल्डेड) पर्वत […]
Read moreजैनधर्म की पर्यावरणीय नैतिकता में पारिस्थितिकी स्थिरता और करुणा का सिद्धान्त
‘परस्परोपग्रहो जीवानाम्‘ जो पारिस्थितिकी विज्ञान का यथार्थ है। पदमचन्द गांधी आज सम्पूर्ण विष्व में पर्यावरण, प्रदूषण और चेतना चेतावनी का विषय बन गया है। मनुष्य […]
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