मराठवाड़ा एक सूखा-प्रभावित इलाका है जहां खेती भरोसेमंद नहीं है। सन 1950 के आस-पास अहमदनगर में पहली शुगर फैक्ट्री बनी थी और वहीं से एक […]
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UNEP – तापलहर के वातावरण में ठंडक हासिल करने के नौ नुस्ख़े
24 जून 2026 जलवायु और पर्यावरण तापलहरें लगातार अधिक तेज़ और ख़तरनाक हो रही हैं, जिससे हर वर्ष लाखों लोगों की जान जाती है. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण […]
Read moreविश्व वर्षावन दिवस (22 जून): महत्व, उद्देश्य, थीम और संरक्षण के उपाय।
वर्षावनों के संरक्षण तथा पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 22 जून को विश्व वर्षावन दिवस (वर्ल्ड रेन फोरेस्ट डे) मनाया जाता […]
Read moreचमगादड़ अक्सर डर या अंधविश्वास का विषय रहे हैं, लेकिन वास्तव में ये हमारे पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के सबसे महत्वपूर्ण नायकों में से एक हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण चरम मौसम, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में उनकी भूमिका को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है । यह लेख इस विषय पर हाल के शोध पर आधारित है ।
पारिस्थितिकी के अदृश्य नायक पर जलवायु परिवर्तन का प्रहार पंकज चतुर्वेदी प्रकृति के जटिल ताने-बाने में हर जीव की भूमिका पूर्व-निर्धारित है, लेकिन मानवीय दृष्टिकोण […]
Read moreबंजर होता बुंदेलखंड
रवीन्द्र व्यास “भूमि को पुनर्स्थापित करो, अवसरों को खोलो” के थीम के साथ मनाए जा रहे विश्व मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम दिवस ने बुंदेलखंड […]
Read moreमहिलाओं के सिर पर मटका, उद्योगों के हाथ में पानी अन्याय की नई रेखा
भारत में भूजल की स्थिति दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है और इस संकट की ओर कई दशकों से अनदेखी हो रही है। नेशनल ग्रीन […]
Read moreयह कहना अतिषियोक्ति नहीं होगा कि गोवा का अस्तित्व मैनग्रोव वनों के कारण है , जिसने वहाँ शहरी इलाके में खारे पानी को रोका हुआ है – साथ ही भूमि कटाव, जल- जीवन का आधार भी मैनग्रोव ही है । पिछले कुछ सालों में कथित विकास के नाम अपर वहाँ मैनग्रोव को उजाड़ा जा रहा है और यह गोवा के अस्तित्व पर खतरे कि चेतावनी है । यह लेख इसी विषय पर है ।
उजड़ते मैनग्रोव वन से गोवा में तबाही का खतरा पंकज चतुर्वेदी गोवा अपनी अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता, नदियों के सघन जाल और समृद्ध जैव-विविधता के लिए विश्व […]
Read moreप्रशांत की तपिश और मानसून की परीक्षा: सुपर अल-नीनो की चुनौती
पंकज चतुर्वेदी सुपर अल-नीनो जैसी गंभीर जलवायु घटना का खतरा हमारे देश के सर पर खड़ा है । प्राकृतिक आपदा से जूझने के लिए देश […]
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