पक्षियों-चूजों को सही समय पर दाना नहीं मिल रहा हर साल साइबेरिया से हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर जब पक्षियों के झुंड भारत की […]
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78 वर्षों की वर्षा-विफलता
भारत के शहरी जलभराव का वैज्ञानिक, भौगोलिक और नीतिगत विश्लेषण अजय सहाय सितंबर 2025 से अक्टूबर के पहले सप्ताह तक भारत के लगभग सभी प्रमुख […]
Read moreविशेषीकृत आपदा विज्ञान विभाग
ग्लोबल वार्मिंग और बदलते जलवायु परिदृश्य में राज्यों की नई आवश्यकता अजय सहाय पिछले कुछ दशकों में बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग और बदलते जलवायु पैटर्न ने […]
Read moreहिमालयी ऑल-वेदर रोड
विकास और आपदा के बीच 5–7 मीटर का संतुलन अजय सहाय हिमालय में 5 से 7 मीटर चौड़ी ऑल-वेदर सड़क निर्माण का प्रश्न केवल विकास […]
Read moreहिमालय में क्लाउडबर्स्ट की बदलती प्रकृति
रात से दिन तक बढ़ती घटनाएँ और जलवायु परिवर्तन का वैज्ञानिक सच अजय सहाय हिमालयी क्षेत्रों में क्लाउडबर्स्ट (मेघफटन) को प्राचीन काल से एक सामान्य […]
Read moreछोटी नदियों ने मचाई बड़ी तबाही
देहरादून के करीब बादल फटने ने चेता दिया है कि छोटी नदियों का अस्तित्व अनिवार्य है पंकज चतुर्वेदी देहरादून जोली ग्रांट हवाई अड्डे से ऋषिकेश […]
Read moreकीटों की घटती प्रजातियाँ
इकोसिस्टम को खतरा ! सुनील कुमार हाल ही में एक प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक में एक खबर पढ़ी।खबर थी कि-‘पिछले 150 वर्षों में लाखों कीट प्रजातियां […]
Read moreजलकुंभी संकट
भारत की आर्द्रभूमियों पर सबसे बड़ा आक्रांता पौधा और उसका वैज्ञानिक-कानूनी समाधान अजय सहाय भारत में जलकुंभी (Eichhornia crassipes) का संकट पिछले 120 वर्षों से […]
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