Category: Rivers and Lakes (नदियाँ और झीलें)

जल बम के मुहाने  पर बैठा है दक्षिण एशिया

जल बम के मुहाने  पर बैठा है दक्षिण एशिया

जब जल पर जंग होगी ! पंकज चतुर्वेदी  ‘खून और आतंकवाद साथ नहीं चल सकता’- पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के विरुद्ध भारतीय नीति ने पानी की […]

Read more
‘हिम नदी’ से ‘रेत नदी’ तक: ग्लेशियरों से सूखती नदियों की कहानी

‘हिम नदी’ से ‘रेत नदी’ तक: ग्लेशियरों से सूखती नदियों की कहानी

ग्लेशियरों से सूखती नदियों की कहानी अजय सहाय जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध ग्लेशियरों का संरक्षण आज मानव अस्तित्व और पृथ्वी की जल, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी […]

Read more
वेटलैंड का वैज्ञानिक और पारिस्थितिक महत्व: कार्बन अवशोषण से ऊर्जा चक्र तक की एक समग्र विवेचना

वेटलैंड का वैज्ञानिक और पारिस्थितिक महत्व: कार्बन अवशोषण से ऊर्जा चक्र तक की एक समग्र विवेचना

वेटलैंड का वैज्ञानिक और पारिस्थितिक महत्व अजय सहाय वेटलैंड्स अर्थात् आर्द्रभूमियाँ, पारिस्थितिक तंत्र का ऐसा महत्वपूर्ण भाग हैं जो न केवल जैव विविधता के लिए […]

Read more
वेटलैंड और मियावाकी जैव विविधता: जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध प्रकृति की ढाल

“वेटलैंड और मियावाकी जैव विविधता: जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध प्रकृति की ढाल”

वेटलैंड और मियावाकी जैव विविधता अजय सहाय वर्तमान जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती के संदर्भ में जब पृथ्वी का औसत तापमान 1.5°C से ऊपर जाने […]

Read more
मणिका मन वेटलैंड : मुजफ्फरपुर के जल

मणिका मन वेटलैंड : मुजफ्फरपुर

मणिका मन वेटलैंड : मुजफ्फरपुर अजय सहाय मणिका मन वेटलैंड : मुजफ्फरपुर के जल, जैव विविधता, पर्यटन और सामुदायिक विकास का आधुनिक उदाहरण के रूप […]

Read more

हमारी नई पुस्तक “यमुना की सहेलियों की पीड़ा ” लेखक प्रवीण पांडे का अंश  अमर उजाला अखबार  के रविवार “मनोरंजन ” में प्रकाशित हुआ है ।

सखी नदियों में पानी कम होगा तो बड़ी नदी भी सूखेगी पर्यावरण लेखक प्रवीण पांडेय ने अपनी किताब ‘यमुना की सहेलियों की पीड़ा’ में यमुना […]

Read more
बुध हो कर अंतिम साँसे ले रहा है किशोर सागर

बुध हो कर अंतिम साँसे ले रहा है किशोर सागर

बुध हो कर अंतिम साँसे ले रहा है किशोर सागर पंकज चतुर्वेदी मध्य प्रदेश में इन दिनों राज्य सरकार का “जल गंगा संवर्धन अभियान” चल रहा […]

Read more
जल निधियों  को उजाड़ने से प्यासे हैं शहर

जल निधियों  को उजाड़ने से प्यासे हैं शहर

जब दिल्ली में यमुना लबालब होती है तो यहाँ के नाले- कारखाने उसमें इतना जहर घोलते हैं कि नदी सारे रास्ते हाँफती है और जब पानी का संकट खड़ा होता है तो नदी की याद आती है । यह हाल केवल दिल्ली का नहीं, देश के लगभग सभी बड़े शहरों का है । अपने तालाबों पर मिट्टी डाल कर कंक्रीट से तन  गया बैंगलुरु तो ’केपटाउन’ की तरह जल-शून्य की चेतावनी से बहाल है और अभी पंद्रह दिन में जब मानसून आएगा तो शहर जल भराव के चलते ठिठक जाएगा ।

Read more