भारत के लिए सदी की सबसे ठंडी चुनौती
अजय सहाय
2025 का शीतकाल भारत के इतिहास का अब तक का सबसे ठंडा और वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण शीतकाल होने जा रहा है क्योंकि इस वर्ष ला नीना (La Niña) प्रभाव अपने चरम रूप में सक्रिय होगा, जिसने भारतीय महासागरीय परिसंचरण, वायुमंडलीय दबाव, समुद्री सतह तापमान और नमी प्रवाह को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है।
ला नीना मूलतः प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी भाग में समुद्री सतह तापमान के सामान्य से 0.5°C से 2.0°C तक गिरने की प्रक्रिया है, जिसके कारण वैश्विक स्तर पर ठंडक बढ़ती है। भारतीय मौसम विभाग (IMD), NOAA (National Oceanic and Atmospheric Administration), और जापान के मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के अनुसार 2025 में दिसंबर से फरवरी के बीच ला नीना की तीव्रता मजबूत श्रेणी (Strong Category) की होगी, जिसके परिणामस्वरूप भारत के उत्तर, मध्य और पूर्वी भागों में औसत तापमान 1.5°C से 3.2°C तक सामान्य से नीचे रहने की संभावना है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह स्थिति पिछले 100 वर्षों में सबसे ठंडी होगी क्योंकि वर्ष 2023-24 में एल नीनो (El Niño) प्रभाव से हुई गर्मी के बाद पृथ्वी का तापमान संतुलन 2025 में तीव्र ठंड की ओर झुकेगा — जिसे El Niño–La Niña cycle reversal कहा जाता है। इस बार प्रशांत महासागर के ऊपर बने उच्च वायुदाब और पश्चिमी प्रशांत के निम्न वायुदाब क्षेत्र ने भारतीय उपमहाद्वीप की सर्द हवाओं को और तीव्र बना दिया है।
हिमालय क्षेत्र में दिसंबर से मार्च तक औसतन 15–20% अधिक बर्फबारी होने का अनुमान है, विशेषकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और सिक्किम जैसे राज्यों में तापमान –4°C से –10°C तक जा सकता है। यही नहीं, दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में कोल्ड डे (Cold Day) और कोल्ड वेव (Cold Wave) की घटनाओं में 40% तक वृद्धि की संभावना है, जिससे स्वास्थ्य, कृषि और ऊर्जा खपत पर सीधा असर पड़ेगा। भारतीय मौसम विभाग के दीर्घकालीन पूर्वानुमान (Extended Range Forecast) के अनुसार उत्तर भारत में न्यूनतम तापमान 1917 और 1962 के रिकॉर्ड को तोड़ सकता है, जब औसत पारा 3.8°C तक गिरा था।
वैज्ञानिक कारणों की दृष्टि से देखें तो ला नीना के दौरान ठंडी हवाएँ पश्चिमी प्रशांत से पूर्वी एशिया की ओर बहती हैं और इससे जेट स्ट्रीम (Jet Stream) दक्षिण दिशा की ओर खिसक जाती है, जो हिमालय और गंगा के मैदानी भागों में ठंडी वायु का जमाव करती है। इस बार जेट स्ट्रीम का झुकाव दिसंबर के पहले सप्ताह से ही भारत की ओर रहेगा, जिससे पूरे उत्तर भारत में दिसंबर से फरवरी तक लगातार घना कोहरा, शीतलहर और ठंडी हवाओं का प्रवाह बना रहेगा। इसी के साथ उत्तर-पश्चिमी शुष्क हवाएँ, जो आम तौर पर जनवरी में सक्रिय होती हैं, इस वर्ष दिसंबर से ही सक्रिय रहेंगी।
इससे रबी फसलें (गेहूँ, चना, मटर, सरसों) प्रभावित होंगी, क्योंकि मिट्टी में नमी की कमी और रात में ओस जमने से फसल वृद्धि धीमी होगी। वहीं सिंचाई जल की मांग 25–30% तक बढ़ेगी, जिससे ऊर्जा खपत में वृद्धि और थर्मल प्लांटों पर दबाव बढ़ेगा। वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, भारतीय उपमहाद्वीप का औसत सतही तापमान पिछले 122 वर्षों में 0.99°C बढ़ा है, परंतु 2025 के शीतकाल में यह वृद्धि अस्थायी रूप से उलट जाएगी क्योंकि ला नीना के कारण वैश्विक औसत तापमान 0.2°C तक गिरने की संभावना है।
2025 की ठंड की तीव्रता के पीछे आर्कटिक ऑस्सीलेशन (AO) और नॉर्थ अटलांटिक ऑस्सीलेशन (NAO) भी अहम भूमिका निभाएंगे। जब AO और NAO नकारात्मक फेज में होते हैं, तो ठंडी हवा ध्रुवों से निचले अक्षांशों की ओर बढ़ती है, जिससे भारत, चीन, और मध्य एशिया तक ठंड की लहर फैलती है। वर्तमान उपग्रह आंकड़े (Copernicus ECMWF, ISRO NRSC 2025) यह संकेत देते हैं कि इस वर्ष AO इंडेक्स –1.8 और NAO इंडेक्स –1.3 पर रहेगा, जो 1976 और 2010 जैसी ठंडी परिस्थितियाँ दोहरा सकता है।
पर्यावरणीय दृष्टि से इसका अर्थ यह है कि ग्लेशियरों का अस्थायी पिघलाव धीमा होगा और उच्च हिमालयी नदियों जैसे गंगा, यमुना, सतलुज, और सिंधु में जल प्रवाह स्थिर रहेगा, परंतु फरवरी-मार्च में जब तापमान अचानक बढ़ेगा, तब ग्लेशियर झीलों (Glacial Lakes) के टूटने का खतरा बढ़ जाएगा। वैज्ञानिकों ने चेताया है कि हिमालयी क्षेत्र में तापमान के तीव्र उतार-चढ़ाव से फ्रॉस्ट हीविंग और लैंडस्लाइड्स की संभावना बढ़ेगी।
भारत के दक्षिणी हिस्सों में जैसे केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक, तापमान सामान्य रहेगा परंतु ठंडी उत्तरी हवाएँ वहाँ तक पहुँचने से रात्रि तापमान औसतन 2°C से 3°C घट सकता है। तटीय क्षेत्रों में इस ठंड के कारण समुद्री नमी संघनित होकर घने कोहरे (Dense Fog) में बदल जाएगी, जो वायु यातायात और सड़क परिवहन के लिए चुनौती बनेगा।
स्वास्थ्य की दृष्टि से, WHO और IMD ने चेताया है कि इस शीतकाल में हाइपोथर्मिया, फ्लू, निमोनिया और श्वसन रोगों के मामले बढ़ेंगे क्योंकि तापमान में गिरावट के साथ वायु गुणवत्ता और कोहरा मिश्रित होकर वायु प्रदूषण की परत (Smog Layer) बनाएगा। पर्यावरणीय रिकॉर्ड के अनुसार, भारत के उत्तरी भागों में हर 20 वर्ष में एक चरम शीतकाल दर्ज होता है — 1975, 1997, 2010 के बाद अब 2025 उस क्रम में चौथा वर्ष होगा।
2025 में माउंट एवरेस्ट, केदारनाथ, बद्रीनाथ और लेह-लद्दाख क्षेत्र में बर्फबारी की मोटाई औसतन 300 से 500 सेंटीमीटर तक जा सकती है, जबकि दिल्ली, जयपुर, लखनऊ और पटना में पारा 3°C से नीचे गिर सकता है।
पर्यावरण मंत्रालय और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने “National Cold Wave Mitigation Plan 2025” तैयार किया है जिसमें शहरों के लिए शेल्टर होम्स, फॉग वार्निंग सिस्टम और स्कूल-कॉलेजों के लिए कोल्ड डे अलर्ट की व्यवस्था शामिल है। जलवायु वैज्ञानिक डॉ. आर. कृष्णन (IITM Pune) और डॉ. राजीव चक्रवर्ती (IMD Delhi) के अनुसार, इस बार ठंडी का मुख्य केंद्र उत्तर पश्चिम भारत (Northwest India) रहेगा जहाँ न्यूनतम तापमान औसतन 3.5°C नीचे जा सकता है, और कोल्ड डे की स्थिति 15 से 20 दिनों तक रह सकती है। इस दौरान पंजाब-हरियाणा की बिजली खपत 35% और दिल्ली की हीटिंग डिमांड 50% तक बढ़ सकती है।
ग्लोबल लेवल पर देखें तो NASA और NOAA के आंकड़े बताते हैं कि 2025 की पहली तिमाही में ला नीना के कारण पृथ्वी का तापमान 2016–17 के बाद सबसे अधिक ठंडा होगा, जिससे विश्व का औसत तापमान 14.6°C के आसपास रहेगा। यह स्थिति अंटार्कटिका और आर्कटिक क्षेत्रों में बर्फ की परतों की स्थिरता के लिए लाभदायक होगी, परंतु भारत जैसे घनी आबादी वाले देशों के लिए स्वास्थ्य और फसलों के लिए चुनौतीपूर्ण होगी।
कुल मिलाकर, 2025 का ला नीना प्रभाव न केवल भारत के मौसम को अत्यधिक ठंडा बनाएगा बल्कि यह हमें जलवायु परिवर्तन के नए संतुलन की याद दिलाएगा — जहाँ अत्यधिक गर्मी और अत्यधिक ठंड दोनों मानव सभ्यता के लिए चेतावनी हैं।
इस वर्ष का शीतकाल यह साबित करेगा कि जलवायु परिवर्तन अब केवल भविष्य की चिंता नहीं बल्कि वर्तमान का अनुभव बन चुका है, और भारत को अपनी Climate Resilience Policy, Green Energy Expansion, Urban Drainage Planning और Rabi Crop Protection Strategy को इसी ठंड की चुनौती को ध्यान में रखकर पुनर्गठित करना होगा, ताकि 2047 तक “Climate Smart India” का लक्ष्य वास्तविकता बन सके।