हर साल एक फीसदी घट रहा है असम
पंकज चतुर्वेदी यदि असम सरकार के जल संसाधन विभाग के आंकड़ों को भरोसेमंद माने तो सन 1950 से अभी तक राज्य की 427,000 हैक्टेयर भूमि […]
Read moreA Portal Dedicate to Indian Climate Change and Ecology in Hindi
पंकज चतुर्वेदी यदि असम सरकार के जल संसाधन विभाग के आंकड़ों को भरोसेमंद माने तो सन 1950 से अभी तक राज्य की 427,000 हैक्टेयर भूमि […]
Read more25 वर्षों की न्यायिक, नीतिगत और पर्यावरणीय यात्रा अजय सहाय गंगा और यमुना नदियाँ भारतीय संस्कृति, सभ्यता, आस्था, कृषि और जीवनरेखा की प्रतीक मानी जाती […]
Read more2013 में इसे यूनेस्को के जैवमंडल कार्यक्रम (ह्यूमन एंड बायोस्पियर प्रोग्राम) में शामिल किया गया पंकज चतुर्वेदी क्या दुनिया के सबसे अधिक अनूठे , वैविध्यपूर्ण और संकटग्रस्त […]
Read moreग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन और आर्सेनिक संकट से जूझते भारत का हरित समाधान अजय सहाय नीम, पीपल, बरगद और जामुन जैसे परंपरागत वृक्ष वर्तमान वैश्विक […]
Read moreउच्च न्यायालय और ट्रिब्यूनल के सख्त फैसले, नदियों-नालों के किनारे विकास पर रोक और आपदा से बचाव का वैज्ञानिक दृष्टिकोण अजय सहाय उत्तराखंड की संवेदनशील […]
Read moreसुरक्षित कॉलोनियों की ओर वैज्ञानिक कदम अजय सहाय हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे हिमालयी राज्यों में जलवायु परिवर्तन के कारण पिछले कुछ वर्षों से […]
Read moreविज्ञान, संविधान और अंतरराष्ट्रीय मॉडल की राह अजय सहाय भारत के वर्तमान परिदृश्य में हिमालयी क्षेत्र में लगातार हो रही भारी वर्षा, मानसून की अनियमितता, […]
Read moreजलवायु खतरों को कब समझेंगे? रोहित पराशर हाल ही में हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं में भारी नुकसान देखने को मिला है और पर्यावरण असंतुलन […]
Read moreशून्य तीर्थयात्री दिवस, चरम वर्षा और जलवायु परिवर्तन की चुनौती हिमालय के चार धाम—बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री—के साथ अमरनाथ और वैष्णो देवी जैसे प्रमुख […]
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