यमुना की बेपरवाही से प्यासी है दिल्लीः पंकज चतुर्वेदी

“रिवर” से “सीवर” बन गई  दिल्ली में यमुना को नया जीवन देने के लिए आज से कोई 9 साल पहले राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण अर्थात एन  जी  टी ने एक आदेश दिया था कि दिल्ली मने नदी का जहां तक बहाव  है अर्थात उसका फ्लड प्लैन या कछार है , उसका सीमांकन किया जाए ।

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फोटो - गूगल

खतरे में धरती

महात्मा गांधी विश्व में मुक्ति के महानतम और अलीक योद्धा रहे हैं। वह हर तरह के अभिशाप और विकार से मुक्ति के हिमायती थे। आज धरती प्रदूषण से मुक्ति की आकांक्षी है। गांधी का कहना था कि धरती सबकी जरूरतें पूरी कर सकती है, सबका लालच नहीं। उन्होंने कहा था- The earth, the land, the air and the water are not an inheritance from our forefathers but an loan from our children. So we have to  handover to them at least as it was handed over to us.
क्या महात्मा के इस अमृत वाक्य में धरती को बचाने का मंत्र निहित नहीं है?

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अरावली के उजड़ने से गहरा रही है जलवायु परिवर्तन की मारः पंकज चतुर्वेदी

अध्ययन के परिणामों से पता चला है कि 1975 से 2019 के बीच अरावली की 3676 वर्ग किमी भूमि बंजर हो गई ।  इस अवधी  में अरावली  के वन क्षेत्र में 5772। 7 वर्ग किमी (7। 63 प्रतिशत) की कमी आई है ।  यदि यही हाल रहे तो 2059 तक कुल 16360। 8 वर्ग किमी (21। 64 प्रतिशत) वन भूमि पर कंक्रीट के जंग उगे दिखेंगे ।

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भूमि कटाव से संकट में असम का अस्तित्व : पंकज चतुर्वेदी

जलवायु परिवर्तन के कारण असम में भू कटाव तेज हो गया है, अभी वहाँ बरसात के पंद्रह दिन हुए है और बाढ़ से कहीं अधिक, अपने घर-गाँव नदी में समा जाने के कारण विस्थापन हुआ है । खतरा इतना गंभीर है कि राज्य के बड़े हिस्से के अस्तित्व पर खतरा है ।

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तपते द्वीप में बदलते शहरः पंकज चतुर्वेदी

अप्रेल महिना शुरू होते ही एक तरफ मौसम विभाग ने चेताया कि  गर्मी और लू का असर  झेलने को जल्द तैयार हो जाएँ तो केन्द्रीय स्वास्थ्य विभाग ने भी राज्यों को बताया दिया है कि बढ़ती गर्मी पर निगाह रखें  और लोगों को इससे सतर्क रहने के लिए जागरूक करें।

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पानी बचाना है तो कुएं बचाने होंगेः पंकज चतुर्वेदी

प्राचीन जल संरक्षण व स्थापत्य के बेमिसाल नमूने रहे कुओं को ढकने, उनमें मिट्टी डाल पर बंद
करने और उन पर दुकान-मकान बना लेने की रीत सन् 90 के बाद तब शुरू  हुई जब लोगों को लगने लगा कि पानी, वह भी घर में मुहैया करवाने की जिम्मेदारी सरकार की है और फिर आबादी के बोझ ने जमीन की कीमत को प्यास से अधिक महंगा बना दिया।

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सावधान! कहर ढहाने वाली है लू

मार्च-24 में संयुक्त राष्ट्र के खाध्य और कृषि संगठन (एफ ए ओ ) ने भारत में एक लाख लोगों के बीच सर्वे कर एक रिपोर्ट में बताया है कि गर्मी/लू के कारण गरीब परिवारों को अमीरों की तुलना में पाँच फीसदी अधिक आर्थिक नुकसान होगा। चूंकि आर्थिक रूप से सम्पन्न लोग बढ़ते तापमान के अनुरूप अपने कार्य को ढाल लेते हैं , जबकि गरीब ऐसा नहीं कर पाते ।

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जल सहेजने की आदत डालनी होगी

भारतीय नदियों के मार्ग से हर साल 1645 घन किलोलीटर पानी बहता है जो सारी दुनिया की कुल नदियों का 4.445 प्रतिषत है।  देश  के उत्तरी हिस्से में नदियो में पानी  का अस्सी फीसदी जून से सितंबर के बीच रहता है, दक्षिणी राज्यों में  यह आंकडा 90 प्रतिषत का है।

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खतरे में हैं बुरहानपुर के जल-भंडारे

आज भी यहां के पानी के पीएच कीमत 7.2 से 7.5 है जोकि एक उच्च स्तर के मिनरल वाटर का मानक है। लेकिन खुले कुडों के पास चूने के कारखाने  लगने से प्रणाली के पानी की पवित्रता भी प्रभावित हुई है। कुंडों के आसपास लोगों का रहना बढ़ता गया है।

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बर्बादी न रोकी तो बेपानी हो जाएगा देश

पानीजन्य रोगों से विश्व में हर वर्ष 22 लाख लोगों की मौत हो जाती है। पूरी पृथ्वी पर एक अरब 40 घन किलोलीटर पानी है। इसमें से 97.5 प्रतिशत पानी समुद्र में है जोकि खारा है, शेष 1.5 प्रतिशत पानी बर्फ के रूप में ध्रुवीय क्षेत्रों में है। बचा एक प्रतिशत पानी नदी, सरोवर, कुआं, झरना और झीलों में है जो पीने के लायक है।

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पानी बचाना है तो बचाएं पारंपरिक जल-प्रणालियाँ

सन् 1944 में गठित ‘फेमिन इनक्वायरी कमीशन’ ने साफ निर्देश दिए थे कि आने वाले सालों में संभावित पेयजल संकट से जूझने के लिए तालाब ही कारगर होंगे । कमीशन की रिर्पाट तो लाल बस्ते में कहीं दब गई  और देश  की आजादी के बाद इन पुश्तैनी तालाबों की देखरेख
करना तो दूर, उनकी दुर्दशा करना शुरू कर दिया ।

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हाथी क्यों न रहा साथी ?

‘द क्रिटिकल नीड आफ एलेफेंट ’ उब्लूडब्लूएफ-इंडिया की  रिपोर्ट बताती है कि  दुनिया में इस समय कोई 50 हजार हाथी बचे हैं इनमें से साठ फीसदी का आसरा  भारत है।  देश  के 14 राज्यों में 32 स्थान हाथियों के लिए संरक्षित हैं।

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