Tag: #भारतकीनदियाँ

जिस साबरमती को आदर्श बताया जा रहा है, पहले उसकी असलियत देख लेनी चाहिए।

यमुना रिवर फ्रन्ट  : नदी है नहीं, महज ज़मीन का सौदा

पंकज चतुर्वेदी दिल्ली सरकार ने यमुना किनारे पल्ला से कालिंदी कुंज तक करीब 52 किलोमीटर लंबा रिवर फ्रंट बनाने की योजना को आगे बढ़ाया है। […]

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झारखण्ड - जिस राज्य की पहचान ही सुरम्य वन और सघन जल संसाधन हुआ करती थी,

झारखण्ड

पंकज चतुर्वेदी जिस राज्य की पहचान ही  सुरम्य वन और सघन जल संसाधन हुआ करती थी, आज गर्मी की शुरुआत में ही बूंद बूंद पानी को […]

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सियांग: नदी को समझे बगैर बांधने की जिद पंकज चतुर्वेदी

सियांग: नदी को समझे बगैर बांधने की जिद

पंकज चतुर्वेदी अरुणाचल प्रदेश की सियांग घाटी में 30 सितंबर (बुधवार) को जो हुआ, वह एक विधायक के घर में तोड़फोड़ भर की खबर नहीं […]

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धरती के बढ़ते तापमान का सीधा असर गलेशयर पर हो रहा है और इन बर्फ के बादलों की गलने से नदियों में प्रवाह बढ़ रहा है और अनियमित भी हो रहा है । यह लेख इसी चिंता पर है

बढ़ती तपन के  गलन में  हो  रहे इजाफे से अनियंतिरत होतीं हिमालय की नदियां

पंकज चतुर्वेदी धरती के बढ़ते तापमान का सबसे प्रत्यक्ष और चिंताजनक असर आज हिमालय के ग्लेशियरों पर दिखाई दे रहा है। दुनिया का तीसरा ध्रुव […]

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Rohit Kaushik

करोड़ों रुपये खर्च, फिर भी कराह रही यमुना

रोहित कौशिक      देश की महत्वपूर्ण नदी यमुना का प्रदूषण एक बड़ी समस्या बन गया है। यमुना के प्रदूषण को लेकर समय-समय पर कई अध्ययन […]

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2026 की गंगा बाढ़ के बाद एक बुनियादी प्रश्न उठता है—क्या गंगा में पानी असामान्य रूप से अधिक आया, या हमने पिछले 30–50 वर्षों में नदी के फैलने की प्राकृतिक जगह को भी लगातार कम किया है? इसका उत्तर केवल आंखों से देखकर या वर्तमान राजस्व नक्शे से नहीं मिल सकता। इसके लिए 1970–80 के दशक से 2026 तक गंगा के सक्रिय बाढ़-मैदान में हुए भूमि-उपयोग परिवर्तन का उपग्रह आधारित वैज्ञानिक ऑडिट आवश्यक है।

अजय सहाय सबसे पहले एक तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है। पूरी गंगा के सक्रिय बाढ़-मैदान में पिछले 30–50 वर्षों में ठीक कितनी कॉलोनियां, कितने किलोमीटर […]

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नदियों के संरक्षण और सांस्कृतिक महत्व पर ‘एक शाम नदी के नाम’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन

सभ्यता और संस्कृति का जीवंत इतिहास रही नदियों के संरक्षण और उनकी महत्ता को रेखांकित करने के लिए दुर्गावती रामनाथ शिक्षा चिकित्सा न्यास द्वारा ‘एक […]

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बिहार का शोक बनी कोसी नदी: जलवायु परिवर्तन, बढ़ता संकट

पंकज चतुर्वेदी सहरसा जिले के सिरवार गाँव में कोसी ऐसी बिफरी कि जमीन का बाद हिस्सा अपने साथ ले गई । दर्जनों घर नदी में […]

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