आखिर क्यों बिगड़ैल हो जाती है झेलम? पंकज चतुर्वेदी जो नदी अभी कुछ हफ्तों पहले तक सुस्त , उदास सी थी, अचानक पहली बरसात में ही […]
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पीलीभीत से चल कर पूर्वाञ्चल में गंगा में मिलने वाली गोमती नदी पर संकट का अर्थ है मध्य भारत के बड़े हिस्से में जल-जनजीवन- खेती- पर भयावह असर । गोमती की दिक्कत है कि उसकी अधिकांश सहायक नदियां सूख गई, जबकि गोमती की विशालता उसकी सखी-सहेलियों पर ही निर्भर है । यह लेख इसी मसले पर है ।
सहायक नदियों के सूखने से गोमती सूखता आंचल पंकज चतुर्वेदी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को अपने आंचल में समेटे बहने वाली गोमती […]
Read moreहर साल एक फीसदी घट रहा है असम
पंकज चतुर्वेदी यदि असम सरकार के जल संसाधन विभाग के आंकड़ों को भरोसेमंद माने तो सन 1950 से अभी तक राज्य की 427,000 हैक्टेयर भूमि […]
Read moreहरित भविष्य की राह: प्रकृति संरक्षण का संकल्प।(28 जुलाई विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर विशेष आलेख)
प्रतिवर्ष 28 जुलाई को जैव विविधता के संरक्षण, विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित किए जाने,पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने तथा आने वाली पीढ़ियों […]
Read moreडिजिटल भारत की बुनियाद में सूखते जलस्रोत
अमेरिका के जॉर्जिया राज्य की न्यूटन काउंटी और उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा के पास स्थित तुसियाना नाम का गांव इन दोनों के बीच भाषा, संस्कृति और […]
Read moreचीन द्वारा तिब्बत में भारत की सीमा के करीब निर्मित सबसे बड़ा बांध – जल विद्युत परियोजना पूरी हो गई है । इससे अरुणाचल प्रदेश सहित उत्तर-पूर्वी राज्यों की जल धाराओं के किनारे भासे शहरों- बस्तियों पर आशंका के बादल मंडरा रहे हैं । यह लेख इसी मसले पर है।
पूर्वोत्तर पर तिब्बत में चीनी बांध का पहरा पंकज चतुर्वेदी तिब्बत के पठार से निकलकर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को जीवन देने वाली यारलुंग त्साँगपो […]
Read moreनदी में दूध : आस्था का अतिवाद और पारिस्थितिकी पर प्रहार
नर्मदा नदी के अभिषेक के लिए टैंकरों से 11 हजार लीटर दूध नर्मदा में अर्पित पंकज चतुर्वेदी नर्मदा, जिसे मध्य भारत की जीवनरेखा कहा जाता […]
Read moreझेलम का मौन: उत्तर भारत की जल सुरक्षा पर मंडराता संकट
साल 2026 के मार्च का पहला सप्ताह एक ऐसी खामोशी लेकर आया है जिसने पर्यावरणविदों और नीति-निर्धारकों की नींद उड़ा दी पंकज चतुर्वेदी कश्मीर की […]
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