Tag: #भारतकीनदियाँ

मानसून है तो बाढ़ भी जरुरी है !

पंकज चतुर्वेदी प्यास और पानी के लिए  पलायन के कारण कुख्यात बुंदेलखंड में महाराज छत्रसाल द्वारा स्थापित छतरपुर शहर के सबसे बड़े तालाब किशोर सागर […]

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 भारत की नदियों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

पंकज चतुर्वेदी भारत की नदियाँ केवल जलधाराएँ नहीं हैं, बल्कि कृषि, पेयजल, बिजली उत्पादन, जैव-विविधता, परिवहन और करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार हैं। गंगा, […]

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आठ बहनों पर जलवायु परिवर्तन की तगड़ी मार :कम बरसात और अधिक तबाही –

आठ बहनों पर जलवायु परिवर्तन की तगड़ी मार  :कम बरसात और अधिक तबाही –

पंकज चतुर्वेदी इस साल पूर्वोत्तर भारत में बारिश का हिसाब जितना चौंकाता है, तबाही का मंज़र उससे कहीं ज़्यादा डराता है। भारतीय मौसम विभाग के […]

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“प्रकृति की सीमा तोड़ता विकास: मंदाकिनी–शिप्रा का जलप्रलय हमें क्या सिखा रहा है?”

अजय सहाय चित्रकूट की मंदाकिनी नदी का अगस्त 2026 में अचानक विकराल हो जाना केवल एक स्थानीय बाढ़ की घटना मानकर भुला देना बड़ी भूल […]

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चित्रकूटः मंदाकिनी का रौद्र रूप, तपोभूमि के किनारे डूब गए हमारे सपने

मुकुंद/अभिमन्यु, चित्रकूट आपदा अध्ययन केंद्र #चित्रकूट के रामघाट पर आज सन्नाटा है। वह सन्नाटा जो आरती की भीड़, मंत्रों की गूंज और भक्तों के चरणों […]

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हालांकि इस बार अल नीनो के कारण भारत में बरसात का पेटर्न अनियमित है , बहुत से हिस्सों में बरसात कम हुई लेकिन जहँ भी बरसात हुई वहाँ बाढ़ ने जनजीवन को प्रभावित  किया । यह लेख बाढ़ के बढ़ते दायरे, उसके कारण आदि पर हैं । 

विशेष संपादकीय लेख | जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाएं      पंकज चतुर्वेदी बाढ़ का बढ़ता दायरा: कारण, विभीषिका और बचाव के उपाय: इस बार भले ही […]

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हिमालय में नदी को केवल उसके आज के बहते जल से पहचानना एक गंभीर नियोजन भूल हो सकती है। नदी का वर्तमान चैनल उसका पूरा प्राकृतिक अधिकार क्षेत्र नहीं होता। हजारों वर्षों में नदी अपना रास्ता बदलती है, किनारों को काटती है, नए चैनल बनाती है और अचानक बाढ़ के समय पुराने रास्तों में वापस प्रवेश कर सकती है। इसी तरह पहाड़ी नाले अपने मुहाने पर बार-बार पत्थर, बोल्डर, बजरी, रेत और मिट्टी जमा करके पंखे के आकार का भू-भाग—मलबा-पंख (debris/alluvial fan) बनाते हैं।

अजय सहाय ऐसी जमीन अक्सर अपेक्षाकृत समतल होती है, इसलिए हिमालय में होटल, बाजार, स्कूल, सड़क और कॉलोनी बनाने के लिए आकर्षक दिखाई देती है। […]

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क्यों कामयाब नहीं है नमामि गंगे परियोजना गंगा की  निर्मलता को नारों नहीं संकल्प की जरूरत

पंकज चतुर्वेदी आस्था के केंद्र बनारस में गंगा और उससे मिलने वाली  सहायक धाराओं – वरुणा  और असि में  पारंपरिक देशी मछलियों  का मरना, उनकी […]

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