स्वतंत्रता के बाद भारत में Wetlands क्षेत्र का राज्यवार विस्तार और वैश्विक मॉडल की साझी कहानी
अजय सहाय
भारत में आर्द्रभूमियाँ (wetlands) जिन्हें प्रकृति की किडनी कहा जाता है, जल संग्रहण, भूजल पुनर्भरण, बाढ़ नियंत्रण, जलवायु परिवर्तन शमन और जैव विविधता के संरक्षण के लिए जीवनरेखा हैं, किंतु स्वतंत्रता के बाद तेजी से शहरीकरण, औद्योगीकरण और अतिक्रमण के कारण wetlands सिकुड़ते गए, हालांकि हाल के वर्षों में न्यायालयीय आदेशों, राज्य सरकारों की योजनाओं और राष्ट्रीय स्तर पर Wetland Rules 2010 व 2017 लागू होने के बाद wetlands के क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
राष्ट्रीय Wetland Decadal Change Atlas (2006–07 से 2017–18) के अनुसार देश में आर्द्रभूमियों की संख्या में 18,810 wetlands की वृद्धि और क्षेत्रफल में 0.64 मिलियन हेक्टेयर (6.4 लाख हेक्टेयर) का विस्तार हुआ है, जिससे कुल wetlands क्षेत्र अब 15.98 मिलियन हेक्टेयर हो गया है जो भारत के भूभाग का लगभग 4.86% है, और यह वृद्धि मुख्यतः मानव-निर्मित जल निकायों जैसे reservoirs, tanks और aquaculture ponds की वजह से हुई, जिनमें क्षेत्रफल में 13% और संख्या में 11% वृद्धि दर्ज की गई; राज्यवार स्थिति देखें तो तमिलनाडु (11.6%), महाराष्ट्र (11.2%), आंध्र प्रदेश (10.4%), उत्तर प्रदेश (8%) और गुजरात (7.6%) wetlands क्षेत्र में अग्रणी राज्य हैं, जिनमें गुजरात में inland vs coastal का अनुपात 74% और 26% है ।
हरियाणा का उदाहरण महत्वपूर्ण है, जहाँ 2017–18 में wetlands का क्षेत्र 33,649 हेक्टेयर से बढ़कर 2023–24 तक 36,984.5 हेक्टेयर हो गया यानी 3,335.5 हेक्टेयर की वृद्धि (लगभग 10%) हुई और यह बढ़ोतरी artificial ponds और johads जैसी संरचनाओं से संभव हुई; गुजरात में हाल ही के अध्ययन में पाया गया कि 2020–24 के दौरान wetlands का क्षेत्र तेजी से बढ़ा, विशेषकर कच्छ जिले में 746.87 वर्ग किलोमीटर का विस्तार हुआ, इसके अलावा भारूच (+66.08), आनंद (+52.17), भावनगर (+32.39), बनासकांठा (+21.35) जिलों में भी reservoirs और check dams से wetlands बढ़े ।
राजस्थान में हाल ही में खिचान (फालोदी) और मेनार (उदयपुर) को रामसर साइट घोषित किया गया और सिलिसरह झील (अलवर) को प्रस्तावित किया गया, इससे wetlands संरक्षण की दिशा में नई ऊर्जा मिली; तेलंगाना का Mission Kakatiya देश का सबसे सफल wetlands restoration मॉडल माना जाता है जिसमें 2015–18 के बीच 46,531 झीलों और टैंकों का पुनर्स्थापन किया गया और 265 TMC पानी की क्षमता फिर से जीवित हुई, इसके प्रभाव से कृषि आय में औसतन 78.5% की वृद्धि, groundwater recharge और मछुआरों की आय में 30–35% तक वृद्धि हुई ।
असम में गुवाहाटी का सिलसाको बील wetlands का अच्छा उदाहरण है जहाँ क्षेत्रफल 80 एकड़ से बढ़कर 270 एकड़ किया गया और अवैध निर्माण गिराकर जल भंडारण क्षमता बढ़ाई गई; उत्तर प्रदेश के ओखला बर्ड सैंक्चुरी में न्यायालय के आदेशों के बाद buffer zone तय कर wetlands को अवैध निर्माण और प्रदूषण से बचाया गया; बिहार की कांवड़ झील, जो एशिया की सबसे बड़ी oxbow lake है, का क्षेत्र 68 वर्ग किलोमीटर से घटकर 26 वर्ग किलोमीटर रह गया था लेकिन 2020 में रामसर साइट घोषित होने और न्यायालय व सरकार के प्रयासों से यहाँ संरक्षण और विस्तार की दिशा में कार्य हो रहा है ।
केरल की वेम्बनाड झील और कोल wetlands पर सुप्रीम कोर्ट व केरल हाईकोर्ट ने बार-बार sand mining और अवैध निर्माण पर रोक लगाई और conservation को बढ़ावा दिया; इसके अलावा हाल में भारत ने Ramsar COP15 में यह उपलब्धि दर्ज की कि 68,000 छोटे wetlands को केवल एक वर्ष में revive किया गया, यह दुनिया में एक मिसाल है; वैज्ञानिक दृष्टि से wetlands का महत्व समझें तो एक हेक्टेयर wetland प्रतिवर्ष लगभग 10 लाख लीटर पानी शुद्ध करता है, 40 लाख लीटर वर्षाजल संग्रहित करता है, 6.5 टन CO₂ अवशोषित करता है और बाढ़ के समय 3.5 करोड़ लीटर पानी नियंत्रित करता है, यानी wetlands न केवल जल संरक्षण बल्कि जलवायु परिवर्तन और carbon sequestration के लिए भी जरूरी हैं ।
अदालतों के कई आदेश (Hincha Lal Tiwari 2001, Jagpal Singh 2011, M.K. Balakrishnan 2017) ने wetlands को public trust मानकर इनके संरक्षण को मजबूरी बनाया और राज्य सरकारों को wetlands atlas बनाने, GIS mapping करने और district-level authorities गठित करने का आदेश दिया; इन सब प्रयासों से यह स्पष्ट है कि भारत में wetlands का विस्तार अब 2047 के जल आत्मनिर्भरता vision से जुड़ चुका है।
अगर हम विदेशों की ओर देखें तो wetlands restoration के कई बेहतरीन मॉडल सामने आते हैं जिनसे भारत सीख सकता है—अमेरिका का Everglades Restoration Project (Florida) दुनिया का सबसे बड़ा wetland restoration प्रोजेक्ट है जिसका vision है प्राकृतिक जल प्रवाह को बहाल करना, प्रदूषण कम करना और endangered species को बचाना ।
यहाँ canals और reservoirs बनाकर और 6 अरब डॉलर से अधिक की लागत से wetlands को पुनर्जीवित किया गया; चीन का Yangtze Wetland Model “Room for the River” concept पर आधारित है जिसमें नदी और wetlands को प्राकृतिक फैलाव वापस देकर बाढ़ के खतरे को कम किया गया और groundwater recharge बढ़ाया गया, चीन ने 2 करोड़ हेक्टेयर से ज्यादा wetlands restore किए ।
नेदरलैंड्स का Room for the River Program भी flood control और wetlands restoration का बेहतरीन उदाहरण है, यहाँ vision यह था कि नदियों और wetlands को breathing space मिले ताकि heavy rainfall और sea level rise का असर कम हो; ऑस्ट्रेलिया का Murray-Darling Basin Program water allocation को sustainable बनाता है—कुछ हिस्सा agriculture के लिए और कुछ हिस्सा wetlands के ecological flow के लिए, यहाँ indigenous communities को भी शामिल किया गया; अफ्रीका का Okavango Delta (Botswana) community-led model है जिसमें tribal communities को wetlands के संरक्षण का संरक्षक बनाया गया और eco-tourism व livelihoods को wetlands से जोड़ा गया ।
इन सभी मॉडलों का साझा vision यह है कि wetlands केवल जल संग्रहण का साधन नहीं बल्कि flood control, pollution treatment, biodiversity conservation और livelihoods का आधार हैं, और restoration का लक्ष्य केवल पानी बचाना नहीं बल्कि पूरे ecosystem को revive करना होना चाहिए।
इस प्रकार यदि हम भारत और विदेशों की तुलना करें तो स्पष्ट है कि भारत ने स्वतंत्रता के बाद से अब तक wetlands क्षेत्र में लगभग 6.4 लाख हेक्टेयर का विस्तार किया है और कई राज्यों (हरियाणा, गुजरात, तेलंगाना, असम, राजस्थान) ने योजनाओं और न्यायालयीय आदेशों के तहत wetlands को revive किया है, वहीं विदेशों में अमेरिका, चीन, नेदरलैंड्स, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका जैसे देशों ने अपने-अपने models से दुनिया को दिखाया है कि wetlands restoration sustainable future का आधार है ।
भारत के लिए संदेश साफ है—यदि हम विदेशी best practices को अपने स्थानीय संदर्भों (जैसे Catch the Rain, Jal Jeevan Hariyali, Mission Kakatiya) के साथ जोड़ें तो 2047 तक जल आत्मनिर्भर भारत और biodiversity–friendly देश बनने का vision पूरा किया जा सकता है।