अनियंत्रित भीड़ ने संगम को सीवर बनायाअनियंत्रित भीड़ ने संगम को सीवर बनाया

पंकज चतुर्वेदी

संगम में जो लोग पावन नदी समझ कर डुबकी लगा रहे हैं, असल में वह पानी , आचमन तो दूर नहाने लायक भी नहीं बचा है । नदी का भाव बहुत काम है , गहरापन लगभग नहीं के बराबर और बाहरी गंदगी मिलने की कोई सीमा नहीं हैं । केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की एक रिपोर्ट के माध्यम से सोमवार को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को सूचित किया गया कि प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान विभिन्न स्थानों पर अपशिष्ट जल का स्तर स्नान के लिए प्राथमिक जल गुणवत्ता के अनुरूप नहीं है. सीपीसीबी के अनुसार, अपशिष्ट जल संदूषण के सूचक ‘फेकल कोलीफॉर्म’ की स्वीकार्य सीमा 2,500 यूनिट प्रति 100 एमएल है ।

समझ लें कि फ़ेकल कोलीफ़ॉर्म बैक्टीरिया से पेट दर्द, दस्त, बुखार, और कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं. यह बैक्टीरिया मानव या पशु अपशिष्ट से आता है.

फ़ेकल कोलीफ़ॉर्म से होने वाली बीमारियां:

पेट दर्द, दस्त, बुखार, मतली, पेट में ऐंठन, टाइफ़ाइड बुखार, हेपेटाइटिस, गैस्ट्रोएंटेराइटिस, पेचिश, कान का संक्रमण.फ़ेकल कोलीफ़ॉर्म की वजह से त्वचा ड्राई और डैमेज हो सकती है । फ़ेकल कोलीफ़ॉर्म की वजह से एक्ज़िमा की समस्या भी हो सकती है ।

रिपोर्ट के मुताबिक संगम पर गंगा नदी की जल गुणवत्ता की निगरानी दिन में दो बार यानी सुबह और शाम को की गई। सुबह के दौरान, गंगा नदी की जल गुणवत्ता बाहरी स्नान जल गुणवत्ता मानदंड के अनुसार डीओ के लिए सभी अवसरों पर अनुपालक पाई गई, जबकि पीएच (06 अवसरों पर), बीओडी (16 अवसरों पर) और एफसी (06 अवसरों पर) बाहरी स्नान मानदंड के अनुपालन में नहीं पाए गए । वहीं, शाम के दौरान, डीओ बाहरी स्नान जल गुणवत्ता मानदंड के अनुसार सभी अवसरों पर अनुपालक पाया गया, जबकि पीएच (06 अवसरों पर), बीओडी (15 अवसरों पर) और फीकल कोलिफॉर्म (06 अवसरों पर) मानदंड के अनुपालन में नहीं पाए गए।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों में अपशिष्ट जल के बहाव को रोकने के मुद्दे पर सुनवाई कर रही थी ।

पीठ ने कहा कि सीपीसीबी ने तीन फरवरी को एक रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसमें कुछ गैर-अनुपालन या उल्लंघनों की ओर इशारा किया गया.

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘नदी के पानी की गुणवत्ता विभिन्न अवसरों पर सभी निगरानी स्थानों पर अपशिष्ट जल ‘फेकल कोलीफॉर्म’ के संबंध में स्नान के लिए प्राथमिक जल गुणवत्ता के अनुरूप नहीं थी. प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान बड़ी संख्या में लोग नदी में स्नान करते हैं, जिसमें अपशिष्ट जल की सांद्रता में वृद्धि होती है.’

पीठ ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने समग्र कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने के एनजीटी के पूर्व के निर्देश का अनुपालन नहीं किया है. एनजीटी ने कहा कि यूपीपीसीबी ने केवल कुछ जल परीक्षण रिपोर्टों के साथ एक पत्र दाखिल किया.

NGT ने दिया एक दिन का समय

पीठ ने कहा, ‘यूपीपीसीबी की केंद्रीय प्रयोगशाला के प्रभारी द्वारा भेजे गए 28 जनवरी के पत्र के साथ संलग्न दस्तावेजों की समीक्षा करने पर भी यह पता चलता है कि विभिन्न स्थानों पर अपशिष्ट जल का उच्च स्तर पाया गया है.’

एनजीटी ने उत्तर प्रदेश राज्य के वकील को रिपोर्ट पर गौर करने और जवाब दाखिल करने के लिए एक दिन का समय दिया.