Author: indiaclimatechange

पर्यावरण संरक्षण, लैंगिक समानता और हमारी सांस्कृतिक विरासत को संजोकर रख रहा राजसमंद का अनूठा गांव पिपलांत्री !

पर्यावरण संरक्षण, लैंगिक समानता और हमारी सांस्कृतिक विरासत को संजोकर रख रहा राजसमंद का अनूठा गांव पिपलांत्री !

सुनील कुमार महला पेड़ हमारे पर्यावरण, हमारे पारिस्थितिकी तंत्र,मानव व धरती के समस्त प्राणियों, वनस्पतियों को बनाए रखने के लिए बहुत आवश्यक है। कहना ग़लत […]

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गर्मी में भी घुट रही हैं दिल्ली की सांसें

गर्मी में भी घुट रही हैं दिल्ली की सांसें

पंकज चतुर्वेदी पंजाब के सुदूर गाँव की रहने वाली इस युवती ने  हिन्दी में पी एचडी किया और दिल्ली के प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्थान में काम […]

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राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान रुड़की

राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान रुड़की

हिंदी में तकनीकी पुस्तक लेखन पुरस्कार योजना वर्ष 2024 जल शक्ति मंत्रालय, जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के […]

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हिंडन नदी पुनरुद्धार योजना

हिंडन नदी पुनरुद्धार योजना

हिंडन जल बिरादरी इंसान के लालच, लापरवाही ने हिंडन को ‘हिडन’ बना दिया है लेकिन जब नदी अपना रौद्र रूप दिखाती है  तब मानव जाति […]

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लू से निबटने को कमर कसना होगा

लू से निबटने को कमर कसना होगा

लू अर्थात हीट वेव आमतौर पर रुकी हुई हवा की वजह से होती है। उच्च दबाव प्रणाली हवा को नीचे की ओर ले जाती है। यह शक्ति जमीन के पास हवा को बढ़ने से रोकती है।

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बदलते पर्यावरण में हम

बदलते पर्यावरण में हम

अब शहरों में पेड़ हमें पार्क, बड़ी सोसाइटी के लॉन या सार्वजनिक जगहों पर मिलेंगे। पिछले कुछ वर्षों में  शहर में सुंदरता के नाम पर फुटपाथ पक्के किए जा रहे हैं, नालियों को पाटा जा रहा है। अपने घरों में लोग गेट तक फर्श पक्का करवा रहे हैं जिससे घर में मिट्टी नहीं आए, पेड़ों से पत्ते नहीं गिरें।

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आखिर बड्डाल में 'क्लोरफेनापायर  कहाँ से आया  ?

आखिर बड्डाल में ‘क्लोरफेनापायर  कहाँ से आया  ?

हालांकि एट्रोपिन का इस्तेमाल ऑर्गेनोफॉस्फोरस विषाक्तता के लिए एक मारक है, लेकिन आश्चर्यजनक यह है कि किसी भी बीमार या मारे गए लोगों के शरीर में ऑर्गेनोफॉस्फोरस विषाक्तता के कोई लक्षण दिखे नहीं ।   अब मौत का कारण जिस क्लोरफेनापायर को कहा जा रहा है , उसका यहाँ दूर दूर तक कोई इस्तेमाल करता नहीं ।

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यहां प्लास्टिक, वहां प्लास्टिक, आखिर कहां नहीं है प्लास्टिक ?

यहां प्लास्टिक, वहां प्लास्टिक, आखिर कहां नहीं है प्लास्टिक ?

सुनील कुमार महला प्लास्टिक मनुष्य से लेकर धरती के समस्त जीवों, हमारे पर्यावरण और पारिस्थितिकी के लिए एक प्रकार से ज़हर है। आज देश-दुनिया को […]

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जल प्रबंधन और संरक्षण

जल प्रबंधन और संरक्षण:

जल संकट का एकमात्र समाधान विकास परसराम मेश्राम जल मनुष्य के जीवन का मूल आधार है। धरती पर हर जीव का अस्तित्व जल पर निर्भर […]

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जलवायु परिवर्तन पर तेलंगाना राज्य कार्य योजना

जलवायु परिवर्तन पर तेलंगाना राज्य कार्य योजना

तेलंगाना दक्कन के पठार के मध्य में स्थित है जहाँ बहुत सारी लहरें, पहाड़ियाँ, नदियाँ, नाले, धाराएँ आदि पाई जाती हैं । तेलंगाना क्षेत्र में […]

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स्वच्छ जल की सुलभता: आज भी एक चुनौती !

स्वच्छ जल की सुलभता: आज भी एक चुनौती !

सुनील कुमार महला, फ्रीलांस राइटर भौगोलिक दृष्टि से भारत विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा देश है, जबकि जनसंख्या के दृष्टिकोण से आज के समय दुनिया […]

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जलवायु परिवर्तन पर सिक्किम राज्य कार्य योजना

जलवायु परिवर्तन पर सिक्किम राज्य कार्य योजना

सिक्किम एक उत्तर-पूर्वी भारतीय राज्य है जो 27डिग्री 04’ 46” दक्षिण से 28o 07’ 48” उत्तर अक्षांश और 88डिग्री 00’ 58” पश्चिम और 88डिग्री 55’ […]

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जलवायु परिवर्तन पर तमिलनाडु राज्य कार्य योजना

जलवायु परिवर्तन पर तमिलनाडु राज्य कार्य योजना

वैश्विक स्तर पर अवलोकन जलवायु परिवर्तन परिदृश्य की ओर इशारा करते हैं क्योंकि तापमान बढ़ रहा है, समुद्र का स्तर बढ़ रहा है, चरम घटनाओं […]

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पारंपरिक  ‘जल-तिजोरियां’  ही बचा सकती हैं बेपानी होने से

22 मार्च विश्व जल दिवस

पारंपरिक  ‘जल-तिजोरियां’  ही बचा सकती हैं बेपानी होने से पंकज चतुर्वेदी इस साल मौसम ने  होली से पहले ही तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए […]

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