इकोसिस्टम को खतरा ! सुनील कुमार हाल ही में एक प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक में एक खबर पढ़ी।खबर थी कि-‘पिछले 150 वर्षों में लाखों कीट प्रजातियां […]
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जलकुंभी संकट
भारत की आर्द्रभूमियों पर सबसे बड़ा आक्रांता पौधा और उसका वैज्ञानिक-कानूनी समाधान अजय सहाय भारत में जलकुंभी (Eichhornia crassipes) का संकट पिछले 120 वर्षों से […]
Read moreआर्द्रभूमि संरक्षण
न्यायालयीय निर्णयों से जल आत्मनिर्भर भारत 2047 की दिशा अजय सहाय भारत की आर्द्रभूमियाँ (Wetlands), जिन्हें प्रकृति की किडनी कहा जाता है, देश की पर्यावरणीय […]
Read moreआर्द्रभूमि पुनर्स्थापन की यात्रा
स्वतंत्रता के बाद भारत में Wetlands क्षेत्र का राज्यवार विस्तार और वैश्विक मॉडल की साझी कहानी अजय सहाय भारत में आर्द्रभूमियाँ (wetlands) जिन्हें प्रकृति की […]
Read moreकाथलिक नेता : जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई हेतु वैश्विक शांति जरूरी
पोप 30 के पहले एक संयुक्त बयान में पैक्स ख्रीस्ती अंतरराष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय कारितास और सीआईडीएसई ने प्रकृति की रक्षा के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता […]
Read moreबचपन से जल प्रहरी, पंचायत से जल लोकतंत्र
वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक, न्यायिक और वैश्विक दृष्टिकोण से जल आत्मनिर्भर भारत 2047 अजय सहाय भारत में जल संकट एक बहुआयामी चुनौती बन चुका है जिसे केवल […]
Read moreमानसून को हिन्द महासागर में जलवायु परिवर्तन के परिपेक्ष्य में समझना होगा
अगस्त से चार सितंबर तक देश के उत्तरी हिस्से में सामान्य से तीन गुना अधिक बारिश पंकज चतुर्वेदी इस बार उत्तर भारत में मानसून ने […]
Read moreगंगा–यमुना का जीवित इकाई दर्ज़ा
25 वर्षों की न्यायिक, नीतिगत और पर्यावरणीय यात्रा अजय सहाय गंगा और यमुना नदियाँ भारतीय संस्कृति, सभ्यता, आस्था, कृषि और जीवनरेखा की प्रतीक मानी जाती […]
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