Tag: #पर्यावरण

रूस-यूक्रेन जंग की 3 दिन की बमबारी के बराबर भारत में दिवाली पर जले पटाखे 62,000 टन बारूद का हुआ इस्तेमाल, 2024 की तुलना में करीब 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी

रूस-यूक्रेन जंग की 3 दिन की बमबारी के बराबर भारत में दिवाली पर जले पटाखे

62,000 टन बारूद का हुआ इस्तेमाल, 2024 की तुलना में करीब 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी पर्यावरणीय एजेंसी एनर्जी एंड क्लाइमेट इंटेलिजेंस यूनिट (ईसीआईयू) और केंद्रीय […]

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दिल्ली एनसीआर और उत्तर भारत में साफ हवा खो गई दिवाली और पराली का मिला-जुला असर !

दिल्ली एनसीआर और उत्तर भारत में साफ हवा खो गई

दिवाली और पराली का मिला-जुला असर ! सुनील कुमार महला दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत में वायु प्रदूषण गंभीर समस्या बन गई है।एक प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक […]

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जलवायु संकट से निपटने के वे उपाय कौन से हैं, जो सीमांत किसान सुझाते हैं

जलवायु संकट से निपटने के वे उपाय कौन से हैं, जो सीमांत किसान सुझाते हैं

ब्रिजस्पैन की एक रिपोर्ट जो बताती है कि कैसे देश के सीमांत किसान जिनमें मुख्यरूप से आदिवासी, दलित और महिला किसान शामिल हैं, जलवायु संकट […]

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आखिर हम अपने आने  वाली पीढ़ी को कैसी धरती सौंप कर जाएंगे ?

आखिर हम अपने आने  वाली पीढ़ी को कैसी धरती सौंप कर जाएंगे ?

क्या धर्म केवल पर्व की कुरीतियों को द्विगुणित करना मात्र है ? पंकज चतुर्वेदी कल “एक्स” पर एक लेख साझा किया था जिसमें दीपावली के […]

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प्रदूषण: वर्गीय संकट का असली चेहरा

प्रदूषण: वर्गीय संकट का असली चेहरा

बाढ़, भूस्खलन या भूकंप की तरह प्रदूषण भी कोई प्राकृतिक घटना नहीं कृष्ण नैन बाढ़, भूस्खलन या भूकंप की तरह प्रदूषण भी कोई प्राकृतिक घटना […]

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© UNICEF/Sultan Mahmud Mukut बांग्लादेश में भी हाल के वर्षों में, बारिश और बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है।

जलवायु शिखर सम्मेलन 2025: COP30 की ओर बढ़ते क़दम

दक्षिण एशिया में बाढ़, उत्तरी अमेरिका में जंगल की आग और योरोप में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने वैज्ञानिकों की वर्षों पुरानी चेतावनी को और पुख़्ता […]

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ग्रीन पटाखे: पर्यावरण का सच या नया छलावा?

ग्रीन पटाखे

पर्यावरण का सच या नया छलावा? पंकज चतुर्वेदी बीते एक दशक से दिल्ली एन सी आर में दीपावली और खुशियों के बीच अदालत के बारास्त […]

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सरकारी आंकड़े जंगलों के क्षेत्रफल के साथ गुणवत्ता की भी बात क्यों नहीं करते?

सरकारी आंकड़े जंगलों के क्षेत्रफल के साथ गुणवत्ता की भी बात क्यों नहीं करते?

जंगल से जुड़े सरकारी आंकड़ों का विश्लेषण करती पर्यावरण जानकार, देबादित्यो सिन्हा और हृदयेश जोशी की एक बातचीत । हृदयेश जोशी सरकार द्वारा जारी नए […]

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