विज्ञान, संविधान और अंतरराष्ट्रीय मॉडल की राह अजय सहाय भारत के वर्तमान परिदृश्य में हिमालयी क्षेत्र में लगातार हो रही भारी वर्षा, मानसून की अनियमितता, […]
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हिमालयी महाप्रलय
जलवायु परिवर्तन, चरम वर्षा और ग्लेशियर संकट का वैज्ञानिक विश्लेषण (2010–2025) अजय सहाय हिमालय जिसे “तीसरा ध्रुव” (Third Pole) कहा जाता है, इस शताब्दी की […]
Read moreखेती और ज़मीन, पहाड़ और खनन
भारत की पहचान उसके खेत और पहाड़ कपिल मेवाड़ा भारत की पहचान उसके खेत और पहाड़ हैं। खेती हमारी खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की […]
Read moreनमामि गंगे से आगे
गंगा को जीवित माँ का संवैधानिक दर्ज़ा क्यों आवश्यक अजय सहाय गंगा नदी को भारत की आत्मा और संस्कृति की धुरी कहा जाता है, जिसे […]
Read moreचीन का वेस्टर्न वॉटर डाइवर्ज़न मॉडल और भारत का थार
मरुस्थलीकरण से जल–आत्मनिर्भरता तक की दूरदर्शी दिशा अजय सहाय भारत एक विशाल भूगोल वाला देश है जिसकी नदियाँ, जलवायु और पारिस्थितिकी अत्यंत विविधतापूर्ण हैं; पूर्वोत्तर […]
Read moreग्रामीण कचरा प्रबंधन के मिथक
कचरा प्रबंधन से जुड़ी रणनीतियां आरती सचदेवा भारत की 64% आबादी गांवों में रहती है। फिर भी सरकारों और नीति-निर्माताओं द्वारा कचरे की समस्या को […]
Read moreहिमालय बचाइए तो देश बचेगा
प्रकृति ही नहीं जलवायु परिवर्तन के जिम्मेदार हम मनुष्य भी हैं। शिवचरण चौहान इस साल पहाड़ों पर बहुत अधिक बरसात हुई है। बहुत अधिक भूस्खलन […]
Read moreजलवायु परिवर्तन: पिघलते ग्लेशियर व बारिश ने 11,113 नदियों को बनाया खतरनाक
एशिया की जीवनरेखा पर संकट हिमालय, तिब्बत और पामीर क्षेत्र की 11,113 नदियों में जल प्रवाह तेजी से बढ़ा है। अध्ययन में पाया गया कि […]
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