वैज्ञानिक आधार, डेटा रिकॉर्ड और 2047 के जल आत्मनिर्भर भारत का विज़न अजय सहाय भारत की नदियाँ केवल बहता हुआ जल नहीं बल्कि देश की […]
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कड़ाके की ठंड की वापसी: ला नीना, जलवायु और बहुआयामी प्रभाव
देश भर में मौसम इन दिनों तेजी से करवट ले रहा है पंकज चतुर्वेदी बीते दो साल ठंड के मौसम में पहाड़ों पर बर्फ देर […]
Read moreज़हर लपेटने की आदत
भारत में ‘स्ट्रीट फूड’ संस्कृति पंकज चतुर्वेदी राजस्थान के किसी अंदरूनी कस्बे में कचोड़ी लें या फिर इंदौर-उज्जैन या मालवा के कस्बे में पोहा -जलेबी […]
Read moreबांस में बीज आने से मिजोरम में अकाल की आहट
जब बांस फूलता है, तो मृत्यु और विनाश उसके पीछे-पीछे आता है। पंकज चतुर्वेदी सीमापार म्यांमार से आ गए पचास हज़ार से अधिक शरणार्थियों के […]
Read moreउथली नदियों में पानी का संकट – बिहार
बीते दो दशकों के दौरान बिहार में 4,425 पुल बने हैं। इन सबका मलबा नदियों में गिरा दिया गया। अवैध रेत खनन के अलावा नदियों […]
Read moreतीरे-तीरे नदिया: हर साल बाढ़ में डूबता भारत
प्राकृतिक असंतुलन और मानवीय हस्तक्षेप ने मिलकर भारत में बाढ़ के जोखिम को लगातार गहरा किया है। यह वार्षिक आपदा अब सामाजिक-आर्थिक क्षति का प्रमुख […]
Read moreग्रीन पटाखे
पर्यावरण का सच या नया छलावा? पंकज चतुर्वेदी बीते एक दशक से दिल्ली एन सी आर में दीपावली और खुशियों के बीच अदालत के बारास्त […]
Read moreउथली नदियों में कैसे समाता सावन-भादौ !
बिहार के वे जिले जो बाढ़ के लिए कुख्यात हैं पंकज चतुर्वेदी इस साल तो आषाढ़ से बादल बरसने शुरू हुए तो आश्विन माह में […]
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