Tag: #भारत

ग्रामीण भारत में प्लास्टिक कचरे का हिसाब करना क्यों जरूरी है?

ग्रामीण भारत में प्लास्टिक कचरे का हिसाब करना क्यों जरूरी है?

ग्रामीण भारत में हर साल लाखों टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है, जिसका आकलन नहीं होता। ऐसे में ग्रामीण स्तर के आंकड़ों को जोड़कर एक […]

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बेमौसम बारिश का कहर: किसानों की मेहनत पर प्रकृति की मार ।

बेमौसम बारिश का कहर: किसानों की मेहनत पर प्रकृति की मार ।

उत्तर भारत के कई हिस्सों में बेमौसम मौसम का कहर देखने को मिल रहा है। सुनील कुमार महला भारत विश्व का एक प्रमुख कृषि प्रधान […]

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झेलम का मौन: उत्तर भारत की जल सुरक्षा पर मंडराता संकट

झेलम का मौन: उत्तर भारत की जल सुरक्षा पर मंडराता संकट

साल 2026 के मार्च का पहला सप्ताह एक ऐसी खामोशी लेकर आया है जिसने पर्यावरणविदों और नीति-निर्धारकों की नींद उड़ा दी पंकज चतुर्वेदी कश्मीर की […]

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आस्था और वास्तविकता के बीच गंगा ऋषिकेश–हरिद्वार में स्नान योग्य जल पर वैज्ञानिक सवाल

आस्था और वास्तविकता के बीच गंगा

ऋषिकेश–हरिद्वार में स्नान योग्य जल पर वैज्ञानिक सवाल अजय सहाय ऋषिकेश और हरिद्वार, जो कि गंगा नदी के हिमालयी उद्गम क्षेत्र के सबसे पवित्र और […]

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मार्च में दिसंबर की दस्तक : बिखरता ऋतुचक्र

मार्च में दिसंबर की दस्तक : बिखरता ऋतुचक्र

इस विचित्र कोहरे के पीछे के वैज्ञानिक कारणों को समझना अनिवार्य पंकज चतुर्वेदी भारतीय कैलेंडर में मार्च का महीना उस संधि काल का प्रतीक है […]

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गौरैया:आंगन की चिरैया, प्रकृति की संवेदना

गौरैया:आंगन की चिरैया, प्रकृति की संवेदना

20 मार्च ‘विश्व गौरैया दिवस’ सुनील कुमार महला प्रतिवर्ष 20 मार्च को ‘विश्व गौरैया दिवस’ मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने के पीछे का […]

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आईटी शहरों का विस्तार और भारत का बढ़ता जल संकट

आईटी शहरों का विस्तार और भारत का बढ़ता जल संकट

शहरों में झीलों और तालाबों का पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन को अनिवार्य बनाना अजय सहाय 2003 के बाद भारत में आईटी आधारित शहरीकरण की तेज़ […]

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खेती और पर्यावरण के लिए क्यों जरूरी है दीमक?

खेती और पर्यावरण के लिए क्यों जरूरी है दीमक?

“ऊई हुंका” अर्थात  दीमक की बाँबियाँ  लुप्त होने का अर्थ है कि धरती संकट में हैं । पंकज चतुर्वेदी उड़ीसा का कश्मीर कहलाने वाले कंधमाल […]

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