Tag: #पर्यावरण

एक जगह कुछ साल खेती कर, फिर दूसरी जगह चला जाता था ताकि जंगल खुद को दोबारा तैयार कर सकें। | चित्र साभार: चंद्र प्रताप सिंह

बैगा समुदाय: जंगल हमारे बिना नहीं, हम जंगल के बिना नहीं

जंगल और उसकी संरचना को और बेहतर बनाने में क्या योगदान चंद्र प्रताप सिंह, प्रेमलाल बैगा छत्तीसगढ़ के जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में विशेष रूप से कमजोर […]

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खेती में मौसम का अलर्ट : छतरपुर के किसानों को कृषि विशेषज्ञों ने दी विशेष सावधानी बरतने की सलाह

खेती में मौसम का अलर्ट : छतरपुर के किसानों को कृषि विशेषज्ञों ने दी विशेष सावधानी बरतने की सलाह

बढ़ते तापमान से रबी फसलों में फूल झड़ने और उपज घटने का खतरा जनवरी माह चल रहा है और जिले के खेतों में रबी फसलें […]

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जलवायु परिवर्तन : उत्तरी क्षेत्रों में गर्मी में बढ़ेगा हीट इंडेक्स साल में 50 दिन ज्यादा झेलनी पड़ेगी गर्मी

जलवायु परिवर्तन : उत्तरी क्षेत्रों में गर्मी में बढ़ेगा हीट इंडेक्स

साल में 50 दिन ज्यादा झेलनी पड़ेगी गर्मी देश में गर्मी का कहर और बढ़ने वाला है। 2025 में भारत में चरम मौसम के प्रभाव […]

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खतरा बनता बर्फबारी का बदलता मिजाज

खतरा बनता बर्फबारी का बदलता मिजाज

लगातार हर साल पहाड़ों पर बर्फ का कम होना देश के लिए दूरगामी खतरा पंकज चतुर्वेदी कोई 75 दिन बीत गए हैं , कश्मीर से […]

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हाथी- मानव भिड़ंत क्यों बढ़ रही है ?

हाथी- मानव भिड़ंत क्यों बढ़ रही है ?

झारखंड के उड़ीसा से सटे जिले पूर्वी सिंहभूमि में 9 दिनों में 19 लोगों को हाथी द्वारा मार देने की घटना हाथी के बदलते स्वभाव […]

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जलवायु अनुकूलन को नए आयाम देती नागालैंड की औरतें

जलवायु अनुकूलन को नए आयाम देती नागालैंड की औरतें

नित बढ़ते तापमान में दीमापुर की महिला रेहड़ी-पटरी विक्रेता पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय सिविल-सोसाइटी नेटवर्कों का रूख कर रही हैं। उनकी यह कोशिश शहरी अनुकूलन […]

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ग्लोबल वार्मिंग की चेतावनी अब हकीकत बन चुकी है यूरोपीय संघ की कोपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा (सी3एस) द्वारा जलवायु परिवर्तन को लेकर आई हालिया रिपोर्ट में गंभीर चेतावनी

ग्लोबल वार्मिंग की चेतावनी अब हकीकत बन चुकी है

यूरोपीय संघ की कोपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा (सी3एस) द्वारा जलवायु परिवर्तन को लेकर आई हालिया रिपोर्ट में गंभीर चेतावनी सुनील कुमार महला धरती का तापमान […]

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बापू (गांधी का स्वराज) , सर्वोदय और हलमा का समकालीन अर्थ

बापू (गांधी का स्वराज) , सर्वोदय और हलमा का समकालीन अर्थ

दूनिया जलवायु परिवर्तन, खाद्य असुरक्षा, भूमि क्षरण और जल संकट जैसी जटिल चुनौतियों से जूझ रही है विकास परसराम मेश्राम दूनिया जलवायु परिवर्तन, खाद्य असुरक्षा, […]

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