दिवाली और पराली का मिला-जुला असर ! सुनील कुमार महला दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत में वायु प्रदूषण गंभीर समस्या बन गई है।एक प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक […]
Read moreTag: #पर्यावरण
जलवायु संकट से निपटने के वे उपाय कौन से हैं, जो सीमांत किसान सुझाते हैं
ब्रिजस्पैन की एक रिपोर्ट जो बताती है कि कैसे देश के सीमांत किसान जिनमें मुख्यरूप से आदिवासी, दलित और महिला किसान शामिल हैं, जलवायु संकट […]
Read moreआखिर हम अपने आने वाली पीढ़ी को कैसी धरती सौंप कर जाएंगे ?
क्या धर्म केवल पर्व की कुरीतियों को द्विगुणित करना मात्र है ? पंकज चतुर्वेदी कल “एक्स” पर एक लेख साझा किया था जिसमें दीपावली के […]
Read moreप्रदूषण: वर्गीय संकट का असली चेहरा
बाढ़, भूस्खलन या भूकंप की तरह प्रदूषण भी कोई प्राकृतिक घटना नहीं कृष्ण नैन बाढ़, भूस्खलन या भूकंप की तरह प्रदूषण भी कोई प्राकृतिक घटना […]
Read moreजलवायु शिखर सम्मेलन 2025: COP30 की ओर बढ़ते क़दम
दक्षिण एशिया में बाढ़, उत्तरी अमेरिका में जंगल की आग और योरोप में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने वैज्ञानिकों की वर्षों पुरानी चेतावनी को और पुख़्ता […]
Read moreग्रीन पटाखे
पर्यावरण का सच या नया छलावा? पंकज चतुर्वेदी बीते एक दशक से दिल्ली एन सी आर में दीपावली और खुशियों के बीच अदालत के बारास्त […]
Read moreसरकारी आंकड़े जंगलों के क्षेत्रफल के साथ गुणवत्ता की भी बात क्यों नहीं करते?
जंगल से जुड़े सरकारी आंकड़ों का विश्लेषण करती पर्यावरण जानकार, देबादित्यो सिन्हा और हृदयेश जोशी की एक बातचीत । हृदयेश जोशी सरकार द्वारा जारी नए […]
Read moreनदियों के संरक्षण और स्वच्छता में स्त्रियों की भूमिका
नदियों के निकट की उर्वर भूमि, जल की निरंतर उपलब्धता, प्राकृतिक संपदा और संसाधन डॉ विभा नायक, दिल्ली विश्वविद्यालय नदियाँ किसी भी संस्कृति का प्राण […]
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