ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरणीय आपदा का वैज्ञानिक विश्लेषण अजय सहाय छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खनन के नाम पर 3,68,217 पेड़ों के काटे […]
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कुछ देर को बत्ती बुझा दो न !
कृत्रिम प्रकाश की उपस्थिति में, जुगनुओं को तेज रोशनी करने की कोशिश में पंकज चतुर्वेदी पिछले महीने महाराष्ट्र के पुरुषवाड़ी , भंडारदरा , राजमाची , प्रबलमाची ,कर्जत जैसे स्थानों […]
Read moreआस्था से जल संरक्षण तक
भारत के धार्मिक स्थलों पर जल पुनर्भरण और रीसायक्लिंग की वैज्ञानिक क्रांति अजय सहाय भारत के धार्मिक स्थलों पर जल का उपयोग एक पवित्र अनुष्ठान […]
Read moreजलवायु संकट से बच्चों की पढ़ाई और सीखने पर मंडराया खतरा
जन्म से पहले और शुरू के वर्षों में गर्मी झेलने वाले बच्चों की स्कूली पढ़ाई होती है कम जो बच्चे छोटी उम्र में गर्मी की […]
Read moreवर्का वाटर
वायुमंडलीय नमी से जल आत्मनिर्भर भारत की ओर एक वैज्ञानिक नवाचार अजय सहाय “वर्का वाटर: भारत में वायुमंडलीय जल संग्रहण की एक वैज्ञानिक संभावना और […]
Read moreधरती के पेट की सूखती परतें: जलविज्ञान, विज्ञान और सामाजिक चेतावनी
राज्यों में भी जल विभागों का समन्वय न होना अजय सहाय भारत को हर वर्ष औसतन 4000 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) वर्षा जल प्राप्त होता […]
Read moreस्वास्थ्य और पर्यावरण पर वार
एल्युमिनियम फॉयल ढक्कनों का सच प्रफुल्ल सक्सेना बाजार में मिलने वाले दही, श्रीखंडऔर अन्य खाद्य उत्पादों पर एक चमचमाता गोल आकार का एल्यूमिनियम फॉयल से […]
Read moreग्लेशियर पर्यटन (Glacier Tourism) और इसका प्रभाव
हमें Glacier Tourism को केवल “आर्थिक अवसर” के रूप में नहीं बल्कि “पारिस्थितिक जिम्मेदारी” के रूप में देखना होगा अजय सहाय ग्लेशियर पर्यटन (Glacier Tourism) […]
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