शहरों की झीलों में माइक्रोप्लास्टिक का बढ़ता प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय चिंता का विषय बन गया है पंकज चतुर्वेदी शहरों की जीवनरेखा कही जाने वाली […]
Read moreTag: #प्रदूषण
दिल्ली की हवा में ज़हर: दमघोंटू प्रदूषण और सिमटती ज़िंदगी
दिल्ली-एनसीआर में 15 दिसंबर 2025 सोमवार को जहरीले स्मॉग की परत छाई रही। सुनील कुमार महला सर्दी का मौसम शुरू होने के साथ ही दिल्ली […]
Read moreबढ़ते प्रदूषण से जूझते बड़े शहर
1990 से आज तक का परिवर्तन और Vision-2047 का पर्यावरणीय भविष्य अजय सहाय 1990 के दशक में भारत और दुनिया के बड़े शहरों में प्रदूषण […]
Read moreघुटन में डरी दिल्ली
हर दीपावली के बाद दिल्ली शहर का घुटता दम संदीप जोशी हर दीपावली के बाद दिल्ली शहर का दम तो घुटता ही है। लेकिन गए […]
Read moreकूड़ा हर दिन बढ़ती बड़ी समस्या
प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने के लिए जागरूकता अभियान अनुपमा तिवाड़ी आप ऑनलाइन कोई पुस्तक मँगवाएं। पुस्तक कई बार चौड़ी पारदर्शी टेप से पूरी तरह […]
Read moreक्यों उड़ाई गई सुप्रीम कोर्ट के आदेश की धज्जियां ?
दिल्ली-एनसीआर में कुछ शर्तों के साथ ग्रीन पटाखें जलाने की अनुमति दे दी रोहित कौशिक सुप्रीम कोर्ट द्वारा ग्रीन पटाखों को जलाने की अनुमति देने […]
Read moreदिल्ली एनसीआर और उत्तर भारत में साफ हवा खो गई
दिवाली और पराली का मिला-जुला असर ! सुनील कुमार महला दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत में वायु प्रदूषण गंभीर समस्या बन गई है।एक प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक […]
Read moreप्रदूषण: वर्गीय संकट का असली चेहरा
बाढ़, भूस्खलन या भूकंप की तरह प्रदूषण भी कोई प्राकृतिक घटना नहीं कृष्ण नैन बाढ़, भूस्खलन या भूकंप की तरह प्रदूषण भी कोई प्राकृतिक घटना […]
Read moreखतरे में धरती
महात्मा गांधी विश्व में मुक्ति के महानतम और अलीक योद्धा रहे हैं। वह हर तरह के अभिशाप और विकार से मुक्ति के हिमायती थे। आज धरती प्रदूषण से मुक्ति की आकांक्षी है। गांधी का कहना था कि धरती सबकी जरूरतें पूरी कर सकती है, सबका लालच नहीं। उन्होंने कहा था- The earth, the land, the air and the water are not an inheritance from our forefathers but an loan from our children. So we have to handover to them at least as it was handed over to us.
क्या महात्मा के इस अमृत वाक्य में धरती को बचाने का मंत्र निहित नहीं है?
ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ निर्णायक जंग अभी बाकी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था-आप किसी शोर का सुनना चाहते हैं या नहीं, यह तय करने का आपको पूरा अधिकार लेकिन सड़क पर जोर जोर से बात करते लोग या साझा तिपहिया में बजते कानफोडू स्टीरियो आदि को इस आदेश की कतई परवाह नहीं ।
Read moreतकनीकी से नहीं आत्म नियंत्रण से थमेगा साँसों का जहर
शहरों में भीड़ कम हो, निजी वाहन कम हों , जाम न लगे, हरियाली बनी रहे – इसी से जहरीला धुंआ कम होगा । मशीने मानवीय भूल का निदान होती नहीं । हमें जरूरत है आत्म नियंत्रित ऐसी प्रक्रिया की जिससे वायु को जहर बनाने वाले कारक ही जन्म न लें ।
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