उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश का दो दशक का पर्यावरणीय विश्लेषण अजय सहाय उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में पिछले दो दशकों में पेड़ों के धरती को […]
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…ताकि किश्तवाड़ और धराली जैसी आपदाओं से बचा जा सके !
अनियंत्रित निर्माण और प्राकृतिक आपदाएं सुनील कुमार महला दिन-ब-दिन प्रकृति मानव को अपना रौद्र रूप दिखा रही है। भूस्खलन हो, भू-धंसाव हो, बाढ़ हो(अतिवृष्टि), बादल […]
Read moreसुरक्षित पर्यटन और हिमालय संरक्षण
उत्तराखंड-हिमाचल के लिए चरणबद्ध, वैज्ञानिक और पर्यावरण-प्रथम नीति अजय सहाय उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे संवेदनशील हिमालयी राज्यों में पर्यटन (Tourism) एक प्रमुख आर्थिक आधार […]
Read moreग्लेशियर के प्रति लापरवाही महंगी पड़ रही हैं हिमालय को
ग्लोबल वार्मिंग या धरती का गरम होना पंकज चतुर्वेदी मौसम विभाग के आंकड़ों से यह तो साफ़ होता जा रहा हैं कि उत्तराखंड के धराली […]
Read moreएक फूल बचाने के लिए जंगल उगाने की कोशिश
फॉक्सटेल ऑर्किड मिथु गोगोई मैं एक किसान और पर्यावरण संरक्षक हूं और असम के जोरहाट जिले के एक छोटे से कस्बे तीताबोर में रहता हूं। […]
Read moreहिमालय की चेतावनी
नदी-नालों के किनारे बसी बस्तियों की आपदा संवेदनशीलता, क्लाउडबर्स्ट और वैज्ञानिक पुनर्विकास की आवश्यकता अजय सहाय भारत के हिमालयी क्षेत्र (उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, सिक्किम), अरावली […]
Read moreहिमालय की पुकार
सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी, वैज्ञानिक खतरे और एक नए पर्यावरण जनांदोलन की आवश्यकता 28 जुलाई 2025 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया ऐतिहासिक […]
Read moreचुभती धूप – जलता जीवन
जलवायु परिवर्तन – प्रकृति की बदलती करवट सुनीता बंसल एक समय था जब गर्मी की धूप बच्चों के लिए खेल का निमंत्रण होती थी, और […]
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