Tag: #पर्यावरण

भारत में 45 करोड़ लीटर ईंधन की रोज़ाना खपत प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग और हरित ऊर्जा की वैज्ञानिक आवश्यकता

भारत में 45 करोड़ लीटर ईंधन की रोज़ाना खपत

प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग और हरित ऊर्जा की वैज्ञानिक आवश्यकता अजय सहाय भारत में प्रतिदिन लगभग 10 करोड़ लीटर पेट्रोल और 35 करोड़ लीटर डीज़ल का […]

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हर सांस में प्लास्टिक माइक्रोप्लास्टिक से बढ़ते हृदय रोग और फेफड़ों के कैंसर का खतरा

हर सांस में प्लास्टिक

माइक्रोप्लास्टिक से बढ़ते हृदय रोग और फेफड़ों के कैंसर का खतरा अजय सहाय हर दिन इंसान जिस हवा में सांस ले रहा है, उसमें अब […]

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पंचायती राज संस्थान जल सुरक्षा को तेजी से सुनिश्चित कर सकते हैं

पंचायती राज संस्थान जल सुरक्षा को तेजी से सुनिश्चित कर सकते हैं

जल प्रबंधन के स्थायी समाधानों की योजना बनाने और उन्हें सबसे उपयुक्त तरीके से ज़मीन पर लागू करने में स्थानीय सरकारें सबसे कारगर हो सकती […]

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क्या है जल सुरक्षा: भारत की चुनौतियां और समाधान

क्या है जल सुरक्षा: भारत की चुनौतियां और समाधान

किसी भी देश की सुरक्षा सिर्फ़ उसकी सीमाओं से संबंधित कारकों पर ही निर्भर नहीं होती। पानी जैसे संसाधनों की स्थिति भी सुरक्षा को प्रभावित […]

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नदियों की कहानी, समुदायों की ज़ुबानी : पूर्वोत्तर जनस्मृति का डिजिटल अभिलेख

नदियों की कहानी, समुदायों की ज़ुबानी : पूर्वोत्तर जनस्मृति का डिजिटल अभिलेख

जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच, नदी किनारे बसे समुदाय मेमोरी मैप्स, ऑडियो नोट्स और तस्वीरों के माध्यम से मौखिक इतिहास और पारंपरिक अनुकूलन रणनीतियों […]

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मिजोरम में शिकार की परंपरा को चुनौती देता एक बर्डवॉचिंग फेस्टिवल

मिजोरम में शिकार की परंपरा को चुनौती देता एक बर्डवॉचिंग फेस्टिवल

हर वर्ष आइजोल के साइलाम बर्ड सैंक्चुअरी में आयोजित होने वाला सीएससी एक सप्ताह तक चलने वाला एक पक्षी गणना अभियान है। ललओमोईया साइलो मिजोरम […]

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स्वच्छता का पर्व है होली

स्वच्छता का पर्व है होली

कहानियां,किवदंतियां कुछ भी कहें,लेकिन इस पर्व का वास्तविक संदेश तो – स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण ही है पंकज चतुर्वेदी होली भारत में किसी एक जाति, […]

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पोरंबोके: शहरी सामुदायिक संसाधनों की पुनर्कल्पना

पोरंबोके: शहरी सामुदायिक संसाधनों की पुनर्कल्पना

अगर पानी साफ तौर पर दिखाई दे, सबके लिए आसानी से उपलब्ध हो, और रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाए, तो हमारे शहर कैसे […]

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