Tag: #हिमालय

देवदार से गंगा तक हिमालयी वनों की जैव-रासायनिक शक्ति, बैक्टीरियोफेज विज्ञान और गंगा की स्व-शुद्धिकरण क्षमता पर विकास का प्रभाव

देवदार से गंगा तक

हिमालयी वनों की जैव-रासायनिक शक्ति, बैक्टीरियोफेज विज्ञान और गंगा की स्व-शुद्धिकरण क्षमता पर विकास का प्रभाव अजय सहाय हिमालय की गोद में स्थित देवदार (Cedrus […]

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भारत का नया भूकंप जोखिम मानचित्र मध्य हिमालय की अत्यधिक संवेदनशीलता और जलवायु परिवर्तन के युग में बढ़ता खतरा — एक दृष्टिनिष्ठ वैज्ञानिक विश्लेषण (2047 परिप्रेक्ष्य)

भारत का नया भूकंप जोखिम मानचित्र

मध्य हिमालय की अत्यधिक संवेदनशीलता और जलवायु परिवर्तन के युग में बढ़ता खतरा — एक दृष्टिनिष्ठ वैज्ञानिक विश्लेषण (2047 परिप्रेक्ष्य) अजय सहाय भारत के नवीनतम […]

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नए भारत के लिए नई हिमालयी राजनीति विज्ञान, भूगर्भ और वैश्विक अनुभवों का समन्वय

नए भारत के लिए नई हिमालयी राजनीति

विज्ञान, भूगर्भ और वैश्विक अनुभवों का समन्वय अजय सहाय हिमाचल प्रदेश और पूरे भारतीय हिमालयी क्षेत्र की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यहाँ के […]

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हिमालयी ऑल-वेदर रोड

विकास और आपदा के बीच 5–7 मीटर का संतुलन अजय सहाय हिमालय में 5 से 7 मीटर चौड़ी ऑल-वेदर सड़क निर्माण का प्रश्न केवल विकास […]

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हिमालय पार करता मानसून

भारतीय आपदाएँ, वैश्विक जलवायु और जल आत्मनिर्भरता की दिशा अजय सहाय हिमालय और मानसून का संबंध केवल भारतीय उपमहाद्वीप तक सीमित नहीं है बल्कि यह […]

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हिमालय में क्लाउडबर्स्ट की बदलती प्रकृति रात से दिन तक बढ़ती घटनाएँ और जलवायु परिवर्तन का वैज्ञानिक सच

हिमालय में क्लाउडबर्स्ट की बदलती प्रकृति

रात से दिन तक बढ़ती घटनाएँ और जलवायु परिवर्तन का वैज्ञानिक सच अजय सहाय हिमालयी क्षेत्रों में क्लाउडबर्स्ट (मेघफटन) को प्राचीन काल से एक सामान्य […]

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हिमालयी चारधाम यात्रा और आपदाएँ शून्य तीर्थयात्री दिवस, चरम वर्षा और जलवायु परिवर्तन की चुनौती

हिमालयी चारधाम यात्रा और आपदाएँ

शून्य तीर्थयात्री दिवस, चरम वर्षा और जलवायु परिवर्तन की चुनौती हिमालय के चार धाम—बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री—के साथ अमरनाथ और वैष्णो देवी जैसे प्रमुख […]

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पिघलते हिमालय और बनते वेटलैंड्स जैव विविधता, आपदा और जल आत्मनिर्भरता की चुनौती

पिघलते हिमालय और बनते वेटलैंड्स

जैव विविधता, आपदा और जल आत्मनिर्भरता की चुनौती अजय सहाय हिमालयी क्षेत्र को विश्व की “तीसरी ध्रुवीय पट्टी” कहा जाता है क्योंकि यहाँ 9,575 से […]

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हिमालयी महाप्रलय जलवायु परिवर्तन, चरम वर्षा और ग्लेशियर संकट का वैज्ञानिक विश्लेषण (2010–2025)

हिमालयी महाप्रलय

जलवायु परिवर्तन, चरम वर्षा और ग्लेशियर संकट का वैज्ञानिक विश्लेषण (2010–2025) अजय सहाय हिमालय जिसे “तीसरा ध्रुव” (Third Pole) कहा जाता है, इस शताब्दी की […]

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युवा और नाजुक हिमालय पर पर्यटन का दबाव भूगर्भीय सहनशीलता, भार वहन क्षमता और वैज्ञानिक चेतावनी

युवा और नाजुक हिमालय पर पर्यटन का दबाव

भूगर्भीय सहनशीलता, भार वहन क्षमता और वैज्ञानिक चेतावनी अजय सहाय हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्य हाल ही में बने युवा हिमालय (Newly Himalayan Range) […]

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हिमालय बचाइए तो देश बचेगा

हिमालय बचाइए तो देश बचेगा

प्रकृति ही नहीं जलवायु परिवर्तन के जिम्मेदार हम मनुष्य भी हैं। शिवचरण चौहान इस साल पहाड़ों पर बहुत अधिक बरसात हुई है। बहुत अधिक भूस्खलन […]

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जलवायु परिवर्तन: पिघलते ग्लेशियर व बारिश ने 11,113 नदियों को बनाया खतरनाक एशिया की जीवनरेखा पर संकट

जलवायु परिवर्तन: पिघलते ग्लेशियर व बारिश ने 11,113 नदियों को बनाया खतरनाक

एशिया की जीवनरेखा पर संकट हिमालय, तिब्बत और पामीर क्षेत्र की 11,113 नदियों में जल प्रवाह तेजी से बढ़ा है। अध्ययन में पाया गया कि […]

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हिमालय में कम बर्फबारी के मायने

सत्तर दिन की बर्फबारी 15 दिन में सिमटने से दिसंबर और जनवरी में हुई लगभग 80-90 प्रतिशत कम बर्फबारी  की भरपाई तो हो नहीं सकती । उसके बाद
गर्मी शुरू हो जाने से साफ जाहिर है कि जो थोड़ी सी बर्फ पहाड़ों पर आई है , वह जल्दी ही पिघल जाएगी । अर्थात आने वाले दिनों में एक तो ग्लेशियर पर निर्भर नदियों में अचानक बाढ़ या आसक्ति है और फिर अप्रेल में गर्मी आते-आते वहाँ पानी का अकाल हो सकता है ।

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पहाड़ बर्फ से सूने, असर हम सब पर

बर्फ न गिरने और मौसम के बदलाव की चिंता अकेले कश्मीर की ही नहीं है , देश के सभी ऐसे इलाके जो हिमाचल की गोद में हैं, इस तरह के संकट का सामना कर  रहे हैं । हिमाचल प्रदेश के  कांगड़ा घाटी में 17 साल बाद सूखा पड़ रहा है.

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